– बीमारी और ऑपरेशन ने बदली जिंदगी, बोले-नशा इंसान ही नहीं पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है
हनुमानगढ़। कभी दिनभर में 70 से अधिक बीड़ियां पीने वाले राजस्थान ऑटो कर्मचारी संघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय कुमार पारीक आज समाज में नशामुक्ति का संदेश देने में जुटे हैं। धूम्रपान की लत ने उनकी सेहत को इतना नुकसान पहुंचाया कि उन्हें मजबूरन बायपास सर्जरी करवानी पड़ी। इस कठिन अनुभव ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। अब वे खुद न केवल धूम्रपान से दूर हैं बल्कि लोगों को भी नशे की आदत छोड़ने के लिए जागरूक कर रहे हैं। विजय कुमार पारीक बताते हैं कि उन्हें बचपन में ही बीड़ी पीने की आदत लग गई थी। उस समय दोस्तों के साथ बैठकर मजाक-मजाक में बीड़ी पीना शुरू किया था। कई बार वे इधर-उधर से बीड़ियां इकट्ठी करके भी धूम्रपान करते थे। परिवार को जब इस आदत के बारे में पता चलता तो उन्हें डांट पड़ती और समझाया जाता कि यह आदत एक बार लग जाए तो छोड़ना बहुत मुश्किल होता है। खासकर उनके पिता अक्सर उन्हें समझाते थे कि धूम्रपान सेहत के लिए बेहद खतरनाक है और समय रहते इसे छोड़ देना चाहिए। लेकिन उस समय कम उम्र और लापरवाही के कारण उन्होंने इन बातों को गंभीरता से नहीं लिया।

धीरे-धीरे बढ़ती गई लत
समय के साथ उनकी यह आदत लत में बदलती चली गई। शुरुआत में दिन में एक-दो बीड़ियां पीने वाले पारीक धीरे-धीरे इतने आदी हो गए कि एक दिन में करीब 70 से 73 बीड़ियां तक पी जाते थे। सुबह उठते ही बीड़ी जलाना और दिनभर लगातार धूम्रपान करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। लगातार और अत्यधिक धूम्रपान का असर धीरे-धीरे उनकी सेहत पर दिखने लगा। उन्हें अक्सर सांस फूलने की समस्या होने लगी। थोड़ी दूरी चलने पर भी दम घुटने जैसा महसूस होता था। कई बार अचानक घबराहट और बेचैनी होने लगती थी। इसके बावजूद वे धूम्रपान छोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। उनके मित्र, रिश्तेदार और परिचित लोग भी उन्हें बार-बार समझाते थे कि इतनी अधिक बीड़ी पीना शरीर के लिए खतरनाक है और इससे गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। लेकिन धूम्रपान की आदत इतनी गहरी हो चुकी थी कि वे चाहकर भी इसे छोड़ नहीं पा रहे थे। कई रिश्तेदार तो उनकी इस आदत के कारण उनसे दूरी बनाने लगे थे, फिर भी उस समय उन्हें इसका अहसास नहीं हुआ।
सेहत बिगड़ने पर डॉक्टर से लिया परामर्श
कुछ समय बाद उनकी तबीयत लगातार खराब रहने लगी। सांस फूलना, थकान और घबराहट की समस्या बढ़ती गई। आखिरकार उन्होंने डॉक्टर से जांच करवाई। जांच रिपोर्ट आने के बाद चिकित्सकों ने साफ शब्दों में कहा कि अत्यधिक धूम्रपान के कारण उनके दिल और शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत धूम्रपान बंद करने और इलाज कराने की सलाह दी। चिकित्सकों के अनुसार स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि उन्हें बायपास सर्जरी करवानी पड़ेगी। यह सुनकर वे और उनका परिवार काफी चिंतित हो गया। आखिरकार चिकित्सकों की सलाह पर उन्होंने बायपास सर्जरी करवाने का निर्णय लिया।
4.50 लाख रुपए खर्च कर करवानी पड़ी सर्जरी
विजय पारीक बताते हैं कि उनकी बायपास सर्जरी पर लगभग साढ़े चार लाख रुपए का खर्च आया। ऑपरेशन के बाद उन्हें करीब छह महीने तक पूरी तरह आराम करना पड़ा। इस दौरान उन्हें अपने जीवन और आदतों के बारे में गहराई से सोचने का अवसर मिला। वे बताते हैं कि ऑपरेशन के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि धूम्रपान की लत ने उन्हें कितनी बड़ी मुसीबत में डाल दिया था। यदि समय रहते सावधान नहीं होते तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। इसी दौरान उन्होंने मन में दृढ़ निश्चय किया कि अब वे जीवन में कभी भी बीड़ी या सिगरेट को हाथ नहीं लगाएंगे।

ऑपरेशन के बाद पूरी तरह छोड़ा धूम्रपान
विजय पारीक कहते हैं कि ऑपरेशन के बाद उनके मन से धूम्रपान की इच्छा लगभग खत्म हो गई। अब उन्हें बीड़ी या सिगरेट की कोई लालसा महसूस नहीं होती। वे पूरी तरह धूम्रपान से दूर हैं और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। जब लोग उनके बारे में सुनते हैं कि वे पहले दिन में 70 से अधिक बीड़ियां पीते थे और अब पूरी तरह धूम्रपान छोड़ चुके हैं, तो उन्हें आश्चर्य होता है। कई लोग उनसे पूछते हैं कि इतनी बड़ी लत को छोड़ना कैसे संभव हुआ। इस पर पारीक बताते हैं कि जब इंसान को अपनी सेहत और परिवार की चिंता होती है तो वह किसी भी बुरी आदत को छोड़ सकता है।
अब समाज में फैला रहे नशामुक्ति का संदेश
अपने अनुभव से सबक लेते हुए विजय पारीक अब समाज में नशामुक्ति का संदेश फैलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे विभिन्न विभागों और संगठनों के कर्मचारियों को धूम्रपान और अन्य नशों से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हैं। विशेष रूप से वे जलदाय विभाग के कर्मचारियों और अन्य परिचित लोगों के बीच जाकर अपने अनुभव साझा करते हैं। वे बताते हैं कि धूम्रपान की आदत धीरे-धीरे इंसान को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल देती है। यदि समय रहते इसे नहीं छोड़ा जाए तो इसका परिणाम जानलेवा भी हो सकता है। उनके प्रयासों का असर भी दिखाई देने लगा है। कई कर्मचारियों और परिचितों ने उनकी बातों से प्रेरित होकर धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दिया है, जबकि कई लोगों ने अपनी आदत में काफी कमी कर दी है।
युवाओं को दे रहे खास संदेश
विजय पारीक का कहना है कि आजकल युवाओं में धूम्रपान और अन्य नशों की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है, जो समाज के लिए चिंता का विषय है। वे युवाओं को विशेष रूप से जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि वे समय रहते इन बुरी आदतों से दूर रह सकें। उनका कहना है कि शुरुआत में धूम्रपान केवल शौक या साथियों के दबाव में शुरू होता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल जाती है। बाद में इसे छोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है।
परिवार भी होता है प्रभावित
पारीक का मानना है कि नशे का असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका पूरा परिवार भी इससे प्रभावित होता है। जब कोई व्यक्ति गंभीर बीमारी का शिकार होता है तो उसके इलाज पर आर्थिक बोझ पड़ता है और परिवार को मानसिक तनाव भी झेलना पड़ता है। वे कहते हैं कि उनकी सर्जरी पर लाखों रुपए खर्च हुए और परिवार को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसलिए वे चाहते हैं कि किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
‘नशा जीवन बर्बाद कर देता है’
विजय पारीक का कहना है कि नशा किसी भी रूप में हो, वह धीरे-धीरे इंसान के जीवन को बर्बाद कर देता है। शुरुआत में यह सामान्य आदत लगती है, लेकिन समय के साथ यह गंभीर बीमारी और आर्थिक-सामाजिक समस्याओं का कारण बन जाती है। वे लोगों से अपील करते हैं कि यदि किसी को धूम्रपान या किसी अन्य नशे की आदत है तो वह जल्द से जल्द इसे छोड़ने का प्रयास करे। उनका कहना है कि सही समय पर लिया गया फैसला जीवन को नई दिशा दे सकता है।
समाज के लिए प्रेरणा बने पारीक
आज विजय कुमार पारीक का जीवन उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है जो किसी न किसी नशे की लत से जूझ रहे हैं। उन्होंने अपने अनुभव से यह साबित कर दिया है कि यदि व्यक्ति ठान ले तो वह किसी भी बुरी आदत को छोड़ सकता है और समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण बन सकता है। विजय पारीक का कहना है कि उनका लक्ष्य अब ज्यादा से ज्यादा लोगों को नशामुक्ति के लिए प्रेरित करना है, ताकि समाज स्वस्थ और जागरूक बन सके। उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे और नशे से दूर रहे तो परिवार और समाज दोनों खुशहाल रह सकते हैं।
