
हनुमानगढ़। जिला मुख्यालय के निकटवर्ती गांव सतीपुरा में रेलवे फाटक पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज के ऊपर बीच में दीवार बनाने के विरोध में सोमवार को पूर्व घोषणानुसार महापंचायत हुई। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि पीडब्ल्यूडी ने दीवार के रूप में पुल पर मौत का कुआं बना दिया है। क्योंकि इस दीवार से वाहन टकराएंगे। उनका कहना था कि दुनिया में ऐसा कोई पुल देखा-सुना नहीं जिसके बीच में दीवार बना दी गई हो। उन्होंने मांग की कि पुल के ऊपर बनाई गई दीवार हटाकर सर्किल बनाया जाए। कृषि उपज मंडी समिति के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर चांवरिया ने कहा कि दुनिया में सात अजूबे बताए जाते हैं। उन्हें तो देखा नहीं लेकिन सतीपुरा ओवरब्रिज के ऊपर बीच में निकाली गई दीवार आठवां अजूबा जरूर है। इससे जंक्शन से संगरिया की तरफ का रास्ता बंद कर दिया गया है। न ही पानी निकासी की व्यवस्था की गई है। पुल के नीचे सर्विस रोड भी टूटी हुई है। विकास का ढिंढोरा पीटकर लोगों को गुमराह किया गया था कि बठिंडा की तर्ज पर इस पुल का शानदार निर्माण होगा और लोग इसे देखने आएंगे लेकिन हुआ इसके उल्ट। लोग आ तो रहे हैं लेकिन शानदार निर्माण के कारण नहीं बल्कि बीच सड़क बनाई गई चीन की दीवार को देखने। उन्होंने कहा कि संगरिया से आने वाले व्यक्ति को पहले इस पुल पर आधा किलोमीटर चढ़ना पड़ेगा। फिर उसे आधा किलोमीटर नीचे पुलिस चौकी की तरफ उतरना पड़ेगा। फिर आधा किलोमीटर वापस चढ़ना पड़ेगा और फिर जंक्शन की तरफ उतरना पड़ेगा। यह मात्र राजनीति के चलते सड़क के नाम पर रड़क निकालने का काम किया गया है। बहुमूल्य संपति को नष्ट करने के इरादे से पूरे सतीपुरा को दंश दिया गया है। पीडब्ल्यूडी अधिकारी भी कमियां-खामियां छुपाकर किसी व्यक्ति विशेष का गुणगान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा इसका ठिकरा कांग्रेस के सिर फोड़ रही है लेकिन इस पुल का शिलान्यास तत्कालीन भाजपा सरकार में सिंचाई मंत्री डॉ. रामप्रताप की ओर से किया गया था। अब पिछले डेढ़ साल से भाजपा इस पुल का निर्माण करवा रही है। यह दीवार अशोक गहलोत या कांग्रेस पार्टी ने नहीं निकाली। यह दीवार यहां के प्रशासन ने पर्ची सरकार के जनप्रतिनिधियों की शह पर निकाली है। इसे इलाके की जनता समझ चुकी है। आने वाले समय में इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। पूर्व पार्षद रामसिंह सिद्धू ने कहा कि पुल के ऊपर बीच में दीवार बनाना गलत है। इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में सड़क को बंद करने के संबंध में हाईकोर्ट का आदेश था। लेकिन उस समय कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों व पीडब्ल्यूडी को आपत्ति दर्ज करवानी चाहिए थी। जब तक दीवार नहीं हटेगी तब तक पुल से टाउन से अबोहर मार्ग पर आवागमन शुरू नहीं होने दिया जाएगा। इस मौके पर ग्राम पंचायत प्रशासक प्रतिनिधि गुरलाल सिंह, सुरेन्द्र बलिहारा, सुधीर बलिहारा, निर्मल सिंह, रामेश्वर वर्मा, रघुवीर वर्मा, बहादुर सिंह चौहान, बसंत सिंह, हरदीप सिंह, गुरविन्द्र सिंह सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।

वार्ता में ग्रामीणों ने रखी यह मांगें
धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों की एसडीएम मांगीलाल सुथार व पीडब्ल्यूडी के कार्यवाहक एसई अनिल अग्रवाल के साथ वार्ता हुई। वार्ता में ग्रामीणों ने मांग रखी कि पुल के मध्य बनाई गई दीवार हटाकर यहां सर्किल का निर्माण किया जाए। पुल के नीचे सर्विस रोड का पुनर्निर्माण करवाया जाए। पेयजल पाइप लाइन की उचित व्यवस्था हो। बरसाती पानी निकासी की व्यवस्था की जाए। स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं। जब तक पुल के ऊपर सर्किल नहीं बन जाता तब तक जंक्शन से संगरिया तथा संगरिया से हनुमानगढ़ पुल का रास्ता बंद किया जाए। दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और वसूली की जाए।

क्या बोले अधिकारी
वार्ता में पीडब्ल्यूडी एसई अनिल अग्रवाल ने बताया कि न्यायालय के आदेश से बनी कमेटियों के सुझाव पर ओवरब्रिज के डिजाइन में परिवर्तन हुआ था। इसलिए दीवार का निर्माण करवाया गया। इस केस को उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। उनके स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता। एसई ने आश्वस्त किया कि मौसम अनुकूल रहा तो पांच-सात दिन में सर्विस रोड का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। वार्ता में सहमति बनी कि जब तक पुल के नीचे की सर्विस रोड नहीं बनती, पेयजल पाइप लाइन व पुल के ऊपर से पानी की निकासी का स्थाई समाधान नहीं होता तब तक ओवरब्रिज का शेष कार्य बंद रहेगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि मांग पूरी न होने पर संघर्ष समिति आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी और पांच जनवरी को चक्काजाम किया जाएगा।
