हनुमानगढ़। अखिल भारतीय किसान सभा ने जिले में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने फसल बीमा क्लेम, गेहूं खरीद व्यवस्था और निजी ब्याज माफिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। जंक्शन स्थित किसान भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में किसान सभा जिलाध्यक्ष मंगेज चौधरी ने कहा कि प्रशासन की अनदेखी के कारण किसानों को लगातार आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई किसान कर्ज के बोझ के चलते मानसिक तनाव में हैं और कुछ मामलों में लोग आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।
ब्याज माफिया पर सख्त कार्रवाई की मांग
किसान सभा नेताओं ने जिले में सक्रिय निजी ब्याज माफिया पर चिंता जताते हुए कहा कि इनके कारण आम लोगों और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। मनमाने ब्याज और कुर्की की कार्रवाई से लोगों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है, लेकिन प्रशासन इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठा रहा है।
फसल बीमा योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल
नेताओं ने फसल बीमा योजना की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि कई स्थानों पर सही तरीके से क्रॉप कटिंग नहीं होने के कारण किसानों को बीमा क्लेम का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले जिले में सालाना बीमा क्लेम की राशि एक हजार करोड़ रुपये से अधिक होती थी, जो अब घटकर लगभग 114 करोड़ रुपये रह गई है, जबकि पिछले वर्ष मौसम की मार अधिक रही थी।
गेहूं खरीद व्यवस्था में बदलाव पर नाराजगी
किसान सभा ने गेहूं खरीद व्यवस्था में बदलाव को लेकर भी असंतोष जताया। नेताओं का कहना है कि पहले एफसीआई के माध्यम से खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से होती थी, लेकिन अब कई एजेंसियों को जिम्मेदारी दिए जाने से व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि खरीद शुरू होने से पहले ही मंडियों में बारदाना की कमी सामने आ रही है, जिससे आने वाले दिनों में किसानों और व्यापारियों को परेशानी हो सकती है।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी
किसान सभा नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विरोध स्वरूप एसडीएम कार्यालयों का घेराव कर कामकाज ठप किया जाएगा। प्रेस वार्ता के दौरान माकपा नेता रघुवीर वर्मा, गोपाल बिश्नोई, ओम स्वामी, चरणप्रीत बराड़ सहित संगठन के कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।
