ऐलनाबाद। भारत सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के साथ-साथ इसे बड़े स्तर पर रोजगारपरक बनाने के लिए भी ठोस कदम उठा रही है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने झींगा पालन को प्राथमिकता देते हुए देशभर में 34 जलीय कृषि क्लस्टर अधिसूचित किए हैं, जिनमें हरियाणा का सिरसा जिला भी शामिल है। यह जानकारी मत्स्य पालन मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने बुधवार को चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू) में आयोजित लवणीय जल जलीय कृषि क्लस्टर विषयक कार्यशाला को संबोधित करते हुए दी। कार्यशाला में अधिकारियों, किसानों और छात्रों ने भाग लिया। इस अवसर पर मत्स्य विभाग के निदेशक पवन कुमार, उपायुक्त शांतनु शर्मा, एनएफडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. विजय कुमार, हिसार रेंज के उपनिदेशक सुरेंद्र कुमार, सिरसा के जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र, फतेहाबाद के जिला मत्स्य अधिकारी बलबीर कुमार, प्रो. जोगिंद्र सिंह, प्रो. एस.के. गहलावत और प्रो. गीता राठी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त सचिव सागर मेहरा व अन्य वरिष्ठ अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला से जुड़े। मंच संचालन सहायक प्रोफेसर डॉ. हरकृष्ण कंबोज ने किया। मत्स्य विभाग के निदेशक पवन कुमार ने हरियाणा में मत्स्य पालन की वर्तमान स्थिति और आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि झींगा उत्पादन के क्षेत्र में सिरसा जिला देश में प्रमुख स्थान रखता है और यहां के किसान बड़ी संख्या में इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

क्लस्टर अप्रोच से ‘बीज से बाजार’ तक मिलेगी सुविधा
डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि क्लस्टर प्रणाली का मुख्य उद्देश्य किसानों को समूह में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य ‘बीज से लेकर बाजार’ तक एक मजबूत श्रृंखला तैयार करना है, जिससे किसानों को बेहतर तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और अपने उत्पाद के लिए उचित बाजार उपलब्ध हो सके।
केंद्रीय सचिव ने किसानों से किया संवाद
कार्यशाला के दौरान देशभर के वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। डॉ. लिखी ने किसानों और छात्रों से सीधा संवाद कर उनके अनुभव और समस्याएं जानीं। इसके बाद उन्होंने गांव रघुआना का दौरा कर किसान प्रीतपाल सिंह और मनप्रीत कौर के खेत में झींगा पालन की गतिविधियों का अवलोकन किया और किसानों से चर्चा कर समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
किसानों ने दिए सुझाव
कार्यशाला में प्रगतिशील किसानों ने झींगा पालन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और तकनीक व बुनियादी ढांचे में सुधार के सुझाव भी दिए। मत्स्य पालक सतविंद्र कौर, जगमीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, मंजीत सिंह और आशिष शर्मा ने सुझाव दिया कि झींगा उत्पादन की जियो-टैगिंग और जियो-फेंसिंग की व्यवस्था की जाए, जिससे उत्पाद की प्रामाणिकता बढ़ेगी और किसानों को बाजार में बेहतर लाभ मिल सकेगा। वर्ष 2018 से झींगा पालन कर रहीं महिला किसान सतविंद्र कौर ने इसे युवाओं के लिए लाभदायक व्यवसाय बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र रोजगार की अपार संभावनाएं प्रदान करता है। वहीं स्वयं सहायता समूह की प्रतिनिधि बिमला सिंवर ने सुझाव दिया कि झींगा पालन के लिए महिला समूहों को पंचायती जमीन पट्टे पर दी जाए, जिससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।
संवाददाता- रमेश भार्गव
