हनुमानगढ़। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर मंगलवार को हनुमानगढ़ जिला पूरी तरह उनके नाम रहा। शहीद स्मारक परिसर में आयोजित विचार गोष्ठी में बड़ी संख्या में लोग केवल औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराने नहीं, बल्कि बाबा साहेब के विचारों को वर्तमान संदर्भ में समझने के उद्देश्य से पहुंचे। कार्यक्रम का विषय ‘बाबासाहेब के विचार: वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कितने प्रासंगिक’ रहा, जिसने माहौल को गंभीर विमर्श और बौद्धिक ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार गोपाल झा ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के विचारों को किसी एक वर्ग तक सीमित करना उनके व्यापक दृष्टिकोण के साथ अन्याय है। उन्होंने संविधान के मूल स्तंभ—समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व—को आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि संविधान को केवल पूजने से नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने से ही उसका वास्तविक अर्थ सामने आता है। मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. बृजेश कुमार अग्रवाल ने संविधान और मूल अधिकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये अधिकार केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की नींव हैं। उन्होंने नागरिकों से अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की अपील करते हुए कहा कि जागरूकता के बिना लोकतंत्र कमजोर पड़ सकता है। वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र छापोला ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बाबा साहेब ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद अंबेडकर ने उच्च शिक्षा हासिल कर यह सिद्ध किया कि शिक्षा ही सशक्तिकरण का सबसे बड़ा साधन है। आज भी वंचित वर्गों के लिए शिक्षा समानता की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण हथियार है। वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. संतोष राज पुरोहित ने बाबा साहेब के आर्थिक दृष्टिकोण पर चर्चा करते हुए कहा कि अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि एक गहन अर्थशास्त्री भी थे। उनके समावेशी विकास और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के विचार आज भी नीति-निर्माण के लिए मार्गदर्शक हैं। दलित साहित्य विशेषज्ञ डॉ. रामकुमार जोईया ने कहा कि बाबा साहेब के दौर का साहित्य सामाजिक असमानताओं को उजागर करने का प्रभावी माध्यम रहा है। उन्होंने नई पीढ़ी से इस साहित्य को पढ़ने और समझने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में शहीद स्मारक के संस्थापक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर सोनी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। संचालन शिक्षाविद हरजिंदर सिंह सैनी ने किया। इस अवसर पर विभिन्न गणमान्य नागरिकों, पत्रकारों और युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि बाबा साहेब के विचारों को केवल याद ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में अपनाया जाए। स्पष्ट संदेश रहा कि अंबेडकर को स्मरण करना सरल है, लेकिन उनके आदर्शों पर चलना ही वास्तविक चुनौती है।
