ग्वालियर। दिल्ली-एनसीआर में ग्रेनेड हमले और टारगेट किलिंग की बड़ी साजिश को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने समय रहते नाकाम कर दिया है। पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े गैंगस्टर शहजाद भट्टी के इशारों पर काम कर रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 21 वर्षीय राजवीर सिंह और 19 वर्षीय विवेक बंजारा के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों को मंगलवार को कोर्ट में पेश कर पांच दिन की रिमांड पर लिया है, ताकि उनसे साजिश के नेटवर्क और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में विस्तृत पूछताछ की जा सके। स्पेशल सेल के अनुसार, यह दोनों आरोपी एनसीआर क्षेत्र में फायरिंग, ग्रेनेड हमले और टारगेट किलिंग जैसी वारदातों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों युवक सोशल मीडिया के माध्यम से गैंग से जुड़े थे और इन्हें धीरे-धीरे आपराधिक गतिविधियों में शामिल किया जा रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, स्पेशल सेल को खुफिया इनपुट मिला था कि एनसीआर में किसी बड़े हमले की तैयारी की जा रही है और इसके तार पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से जुड़े हुए हैं। इसके बाद पुलिस ने एक सुनियोजित ऑपरेशन चलाते हुए 17 अप्रैल को ग्वालियर के डबरा क्षेत्र के बंजारापुरा से विवेक बंजारा को गिरफ्तार किया। इसके अगले ही दिन 18 अप्रैल को राजवीर सिंह को दिल्ली के सराय काले खां इलाके से दबोच लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने राजवीर के कब्जे से एक पिस्टल और छह जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इसके अलावा दोनों आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं, जिनमें संदिग्ध वीडियो और वॉइस नोट्स पाए गए हैं। पुलिस इन डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है, जिससे साजिश के पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। जांच में यह भी सामने आया है कि राजवीर को सोशल मीडिया के जरिए ‘राना भाई’ नामक व्यक्ति ने गैंग से जोड़ा था। बाद में राजवीर ने ही विवेक को इस नेटवर्क में शामिल कराया। मार्च महीने में शहजाद भट्टी ने राजवीर को अहमदाबाद से हथियार लाने का निर्देश दिया था। इसके लिए विवेक को अहमदाबाद भेजा गया, हालांकि वहां हथियारों की डीलिंग सफल नहीं हो पाई। बताया जा रहा है कि अहमदाबाद में विवेक के ठहरने और खर्च के लिए भी गैंग की ओर से करीब पांच हजार रुपये की व्यवस्था कराई गई थी। इससे साफ संकेत मिलता है कि गैंग युवाओं को आर्थिक प्रलोभन देकर अपने नेटवर्क में शामिल कर रहा था। इस पूरे मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि ग्वालियर पुलिस को इस ऑपरेशन की पूर्व जानकारी नहीं थी। स्थानीय पुलिस के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान उनसे कोई संपर्क नहीं किया। इससे यह संकेत मिलता है कि ऑपरेशन पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। फिलहाल, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और इस नेटवर्क के अन्य संभावित लिंक खंगाले जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही हैं, क्योंकि इसका सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
