मैनपुरी। समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव के बयान से सियासी माहौल गरमा गया है। आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए सांसदों पर उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “गद्दार” करार दिया है। रविवार को मैनपुरी दौरे के दौरान सपा कार्यकर्ताओं की बैठक में बोलते हुए उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी ने राज्यसभा तक पहुंचाया, उनका इस तरह पार्टी छोड़ देना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। डिंपल यादव ने बिना नाम लिए राघव चड्ढा और अन्य सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा, “आप जनता के बीच से चुनकर नहीं आए थे, पार्टी ने आप पर भरोसा जताकर आपको संसद भेजा। ऐसे में दूसरी पार्टी में जाना गद्दारी है।” उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम न केवल राजनीतिक नैतिकता को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को भी कमजोर करते हैं। सपा सांसद ने भाजपा पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं को तोड़ने और उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिशें लगातार हो रही हैं। उनके मुताबिक, यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि देश में कई संस्थानों की निष्पक्षता को लेकर संदेह बढ़ता जा रहा है, जो चिंताजनक है। चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी डिंपल यादव ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नए चुनाव आयुक्त के आने के बाद कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान से साफ है कि वे चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रही हैं। राष्ट्रीय राजनीति पर बोलते हुए डिंपल यादव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी एक मजबूत नेता हैं और आगामी चुनावों में उनकी सरकार फिर बनेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) औपचारिक रूप से इंडिया गठबंधन का हिस्सा न हो, लेकिन संसद में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि 2023 से राज्य में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, लेकिन सरकार शांति स्थापित करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि संवाद और समाधान के बजाय हालात को और बिगड़ने दिया गया। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि दुष्कर्म और हत्या के मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल रहा है। कई मामलों में एफआईआर दर्ज कराने में भी मुश्किलें आती हैं, खासकर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गौरतलब है कि 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी। इस फैसले की घोषणा राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में की थी। इसके बाद वे भाजपा कार्यालय पहुंचे, जहां भाजपा नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। राघव चड्ढा ने दावा किया था कि पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने यह फैसला लिया है, इसलिए दलबदल कानून लागू नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें लंबे समय से लग रहा था कि वे “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” हैं और अब उन्होंने संविधान के तहत भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर जहां सपा और अन्य विपक्षी दल इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे नेताओं का व्यक्तिगत निर्णय करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।
