– भारतीय मजदूर संघ की प्रदेश पदाधिकारी बैठक में श्रमिक हितों पर मंथन, ठेका श्रमिकों के शोषण और ठेकेदारों के पंजीयन का मुद्दा प्रमुखता से उठा
हनुमानगढ़। भारतीय मजदूर संघ की दो दिवसीय राजस्थान प्रदेश पदाधिकारी एवं उद्योग प्रभारी बैठक शनिवार को जंक्शन स्थित जाट भवन में शुरू हुई। बैठक में प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों ने संगठन की आगामी कार्ययोजना, श्रमिक समस्याओं और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर गहन मंथन किया। बैठक में प्रदेशाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह डाबी, प्रदेश उपाध्यक्ष गौरीशंकर व्यास, प्रदेश महामंत्री मुकेश सोलंकी, सम्भाग संगठन मंत्री गोविन्द जोशी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री सीवी राजेश, जिलाध्यक्ष कुलदीप शर्मा, जिला मंत्री संदीप सिरावता तथा राजस्थान जलदाय कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महामंत्री इन्द्राज घोटिया सहित प्रदेशभर के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रदेश एवं जिला अधिवेशन, सम्भाग स्तर पर संगठन के विकास कार्यांे की समीक्षा तथा पिछले तीन माह की कार्ययोजना में हुए एवं शेष कार्यांे की समीक्षा की गई। आगामी नवंबर तक किए जाने वाले कार्यांे को लेकर जिम्मेदारियां भी तय की गईं। प्रदेशाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह डाबी ने कहा कि चार लेबर कोड लागू हो चुके हैं तथा राजस्थान में भी तीन लेबर कोड एवं उनके नियम लागू किए गए हैं। इसके बावजूद राजस्थान में इन नियमों और कानूनों की सख्ती से पालना नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में नियम लागू होने के बाद उनकी सख्ती से पालना हो रही है। राजस्थान में भी लेबर कोड की प्रभावी पालना करवाने के लिए उद्योग मंत्री एवं मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी। डाबी ने कहा कि ठेका श्रमिकों के शोषण का मुद्दा भी गंभीर है। ठेकेदारों का पंजीयन नहीं हो रहा, जबकि एक्ट के तहत ठेकेदारों का पंजीयन आवश्यक है। सरकार से वार्ता कर ठेकेदारों का पंजीयन अनिवार्य करवाने तथा ठेका एक्ट के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करवाने का प्रयास किया जाएगा। ठेका श्रमिकों को नियमानुसार सुविधाएं दिलाने का मुद्दा भी सरकार के समक्ष रखा जाएगा। प्रदेश उपाध्यक्ष गौरीशंकर व्यास ने बताया कि संघ की रीति-नीति के अनुसार प्रत्येक दो माह में प्रदेश पदाधिकारी बैठक तथा छह माह में कार्यसमिति की बैठक आयोजित होती है। पदाधिकारी बैठक में लिए गए निर्णयों का कार्यसमिति की बैठक में अनुमोदन किया जाता है। संगठन की गतिविधियों, श्रमिकों की समस्याओं, उत्सव-त्योहारों के आयोजन तथा आगामी आंदोलनात्मक रूपरेखा पर भी इन बैठकों में विचार किया जाता है। बैठक में लिए गए निर्णयों को संगठन के निचले स्तर तक पहुंचाने का कार्य भी इसी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।
