– किसान बोले-महीनों से भुगतान का इंतजार, कई किसानों के 21-21 लाख रुपए अटके, एसडीएम ने मांगी पूरी जानकारी
हनुमानगढ़। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदे गए गेहूं का भुगतान नहीं होने से परेशान किसानों ने मंगलवार को उपखंड अधिकारी श्याम सुंदर बेनीवाल से मुलाकात कर जल्द भुगतान करवाने की मांग की। किसान प्रतिनिधियों ने बताया कि हनुमानगढ़ जंक्शन धानमंडी में एमएसपी पर खरीदे गए गेहूं का करीब साढ़े सात करोड़ रुपए का भुगतान अभी तक किसानों को नहीं मिला है। किसानों ने कहा कि कई माह से भुगतान अटका होने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रेशम सिंह माणुका ने बताया कि इस वर्ष अप्रैल माह से किसान अपना गेहूं धानमंडी में लेकर आने लगे थे। जंक्शन धानमंडी में एमएसपी पर खरीदे गए गेहूं का करीब साढ़े सात करोड़ रुपए का भुगतान बकाया है। उन्होंने बताया कि कई बार जिला कलक्टर और जिला रसद अधिकारी को इस समस्या से अवगत करवाया गया, लेकिन हर बार जल्द भुगतान होने और जांच चलने की बात कही गई। उन्होंने मांग की कि जिन किसानों ने एमएसपी पर सरकार को गेहूं बेचा है, उन्हें जल्द भुगतान किया जाए। साथ ही जिन मामलों में भ्रष्टाचार या अनियमितता सामने आई है, उनमें दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। माणुका ने कहा कि पहले बताया गया था कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी और किसानों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन अब किसानों का भुगतान ही अटक गया है। उन्होंने बताया कि कई किसानों के 21-21 लाख रुपए तक अटके हुए हैं। ऐसे किसान पिछले चार-पांच महीने से इस राशि पर करीब 42 हजार रुपए ब्याज का भार भी उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से अब किसानों को व्यक्तिगत रूप से अपनी समस्या बताने के लिए कहा जा रहा है, जबकि सरकार के पास पर्याप्त कर्मचारी और सिस्टम होने के बावजूद अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है।
एक ही परिवार के किसानों के भुगतान में भी अड़चन
रेशमसिंह माणुका ने बताया कि कई किसानों ने अलग-अलग खरीद एजेंसियों में अपना पंजीयन करवाया था, लेकिन गेहूं एक ही बार बेचा। ऐसे मामलों को धोखाधड़ी नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में दो भाई एक ही खाते में हैं। एक भाई ने पहले पंजीयन करवाकर अपने दस्तावेजों के आधार पर गेहूं बेचा। बाद में दूसरे भाई ने अपने हिस्से की गेहूं की फसल बेच दी, लेकिन उसका भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में किसानों से पांच सौ रुपए के स्टाम्प पर दस्तावेज देने और अपने भाई के खिलाफ एफआईआर करवाने के लिए कहा जा रहा है। उनका कहना है कि जब दूसरे भाई ने अपने दस्तावेज दिए ही नहीं और अपने हिस्से की गेहूं अपने खाते में बेची है तो उसका भुगतान रोका जाना उचित नहीं है।
‘भुगतान नहीं कर सकते तो गेहूं ही वापस करें’
किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार ने किसानों से गेहूं खरीद लिया है, लेकिन भुगतान नहीं किया जा रहा। उन्होंने मांग की कि किसानों के मामलों का शीघ्र निस्तारण कर भुगतान करवाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास भुगतान के लिए राशि नहीं है तो कम से कम किसानों का गेहूं ही वापस कर दिया जाए। इस पर एसडीएम श्याम सुंदर बेनीवाल ने किसान प्रतिनिधियों से कहा कि वे पूरी जानकारी लिखित रूप में उपलब्ध करवाएं। इसके आधार पर पत्र उच्च स्तर पर भेजकर आवश्यक कार्रवाई के लिए मामला रखा जाएगा। इस मौके पर सुभाष गोदारा सहित कई अन्य किसान प्रतिनिधि व किसान मौजूद रहे।
