– तीन दिन में भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
हनुमानगढ़। कर्मचारियों के बकाया भुगतान में देरी और वनकर्मियों की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासंघ की ओर से बुधवार को आंदोलन के प्रथम चरण में मुख्यमंत्री के नाम एडीएम को ज्ञापन सौंपकर लंबित भुगतान तत्काल जारी करने और वनकर्मियों को सुरक्षा संसाधन उपलब्ध करवाने की मांग की गई। महासंघ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि तीन दिन में बकाया भुगतान नहीं हुआ तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। महासंघ ने बताया कि कर्मचारियों को अर्जित अवकाश के नकदीकरण (सरेंडर एवं पीएल) का भुगतान अप्रैल माह के वेतन के साथ किया जाना था, लेकिन वित्त वर्ष के छह माह से अधिक समय बीतने के बावजूद राशि नहीं मिली है। वहीं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के जीपीएफ, एसआई, पेंशन कम्यूटेशन, पीएल नकदीकरण और ग्रेच्युटी जैसे परिलाभों के भुगतान में भी आठ से दस माह तक की देरी हो रही है। इससे कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कार्मिकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महासंघ ने लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की। महासंघ ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन के आगामी चरण भी घोषित किए हैं। इसके तहत द्वितीय चरण में पंचायती राज चुनाव प्रशिक्षण के दौरान भोजन और अल्पाहार का बहिष्कार किया जाएगा। तृतीय चरण में मतदान दिवस पर मतदान दलों की ओर से उपवास रखकर विरोध जताया जाएगा। इसके बाद चतुर्थ चरण में 6 नवंबर को धनतेरस के दिन उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री के आवास पर काली दीपावली मनाने की चेतावनी दी गई है।
खनन माफिया के हमलों से वनकर्मियों की जान खतरे में
महासंघ ने वन विभाग के कर्मचारियों पर खनन माफिया के हमलों का मुद्दा उठाते हुए उनकी सुरक्षा को गंभीर चिंता का विषय बताया। वनकर्मियों को आधुनिक हथियार, वायरलेस सेट, बॉडी प्रोटेक्टर और हेलमेट उपलब्ध करवाने की मांग की गई। प्रत्येक वन चौकी और रेंज के लिए सरकारी चारपहिया गश्ती वाहन व चालक नियुक्त करने तथा जरूरत के अनुसार सशस्त्र पुलिस बल या ईको टास्क फोर्स की सहायता देने की मांग भी उठाई गई। इसके अलावा वनकर्मियों को विशेष भत्ते देने की मांग की गई। महासंघ ने मांग की कि खनन माफिया के हमले में जान गंवाने वाले वनकर्मियों को शहीद का दर्जा दिया जाए। उनके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति और तीन करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए तथा ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में करवाई जाए। महासंघ ने वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों के कैडर का पुनर्गठन करने, 1926 हेल्पलाइन को प्रभावी बनाने और वन रेंजों का पुनर्गठन करने की मांग भी रखी। महासंघ ने मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होने पर वनकर्मियों के साथ मिलकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
