हनुमानगढ़। टाउन क्षेत्र के एक निजी विद्यालय में एलकेजी कक्षा में अध्ययनरत छह वर्षीय बालक को अध्यापिका की ओर से थप्पड़ मारने का मामला सामने आया है। आरोप है कि गृहकार्य गलत करने की मामूली बात पर अध्यापिका ने बालक को थप्पड़ जड़ दिया, जिससे उसके कान में दर्द शुरू हो गया।

जानकारी के अनुसार, रूपचंद ने बताया कि उसका पुत्र महिर टाउन स्थित आदर्श विद्या मंदिर विद्यालय में एलकेजी का छात्र है। दो दिन पूर्व अध्यापिका ने गृहकार्य गलत होने पर उसे थप्पड़ मारा। इसके बाद से बच्चे के कान में दर्द रहने लगा और उसने भोजन करना भी छोड़ दिया। साथ ही वह विद्यालय जाने से भी मना करने लगा। पूछताछ करने पर बच्चे ने परिजनों को बताया कि अध्यापिका रश्मि ने उसे थप्पड़ मारा।

परिजनों ने बच्चे को चिकित्सक को दिखाया, जहां कान में संक्रमण होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य से शिकायत की। प्रधानाचार्य ने संबंधित अध्यापिका से स्वयं बात करने की बात कही। उन्होंने मांग की है कि अध्यापिका के खिलाफ उचित कार्रवाई करते हुए उसे विद्यालय से हटाया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य बच्चे के साथ ऐसी घटना न हो। अन्यथा वे अपने पुत्र का नाम विद्यालय से कटवाने के साथ अन्य अभिभावकों से भी बच्चों को हटाने की अपील करेंगे।

क्या कहते हैं कानूनी प्रावधान
अधिवक्ताओं के अनुसार, यदि किसी शिक्षक की ओर से छात्र को पीटने से चोट पहुंचती है तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराएं 115, 117 एवं 122 लागू हो सकती हैं। यदि बच्चे को किसी हथियार जैसे डंडा या पाइप आदि से पीटा जाए तो धारा 122 के तहत पुलिस थाने में प्रकरण दर्ज करवाया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 के अंतर्गत बच्चे के साथ क्रूरता दंडनीय अपराध है, जिसमें तीन वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। अधिवक्ताओं का कहना है कि शिक्षक भी इस कानून के दायरे में आते हैं। शिकायत के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, बाल कल्याण समिति तथा बाल सहायता दूरभाष सेवा संख्या 1098 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
