हनुमानगढ़। केंद्र एवं राज्य सरकार की कथित किसान विरोधी नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी के खिलाफ जिले में किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में संयुक्त किसान मोर्चा, जिला हनुमानगढ़ के नेतृत्व में 6 मार्च 2026 को एक बड़े प्रदर्शन एवं रोष मार्च का आयोजन किया जाएगा। यह प्रदर्शन सुबह 10 बजे संयुक्त निदेशक (कृषि) कार्यालय, हनुमानगढ़ जंक्शन पर किया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि किसानों के साथ सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा नहीं किया जा रहा है, जिससे किसान आर्थिक और मानसिक रूप से दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। खासतौर पर अटल भूजल योजना के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में स्वीकृत की गई डिग्गियों की अनुदान राशि अब तक जारी नहीं होने से किसानों में भारी रोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि योजना स्वीकृत होने के बावजूद भुगतान में हो रही देरी उनके लिए गंभीर संकट का कारण बन रही है। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि सरकारी सहायता और योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा। डिग्गियों के निर्माण पर किसानों ने पहले ही भारी खर्च कर दिया है, लेकिन अनुदान राशि अटकी होने से वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है, बल्कि खेती से उनका भरोसा भी टूटता जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 6 मार्च को होने वाला यह प्रदर्शन किसानों की एकजुटता और संघर्ष का प्रतीक होगा, जिसमें जिले भर से बड़ी संख्या में किसान भाग लेंगे। प्रदर्शन के दौरान किसान अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी प्रशासन को सौंपेंगे। किसान मोर्चा का कहना है कि सरकार किसानों को केवल आश्वासन देने का काम कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। ऐसे में किसान आंदोलन ही अपनी आवाज उठाने का एकमात्र रास्ता बचा है। मोर्चा ने सभी किसानों से अपील की है कि वे इस शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अपनी एकता और ताकत का प्रदर्शन करें। कुल मिलाकर, 6 मार्च को हनुमानगढ़ में होने वाला यह प्रदर्शन न केवल अटल भूजल योजना की अनुदान राशि को लेकर है, बल्कि यह किसानों के अधिकार, सम्मान और उनके भविष्य की लड़ाई भी है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस रोष मार्च के बाद किसानों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
