-10 माह का कार्यकाल यादगार: एसपी हरिशंकर को पुलिसकर्मियों ने भावुक माहौल में विदा किया
हनुमानगढ़। सोमवार की दोपहर हनुमानगढ़ पुलिस मुख्यालय में एक अलग ही मंज़र देखने को मिला। वर्दी की सख़्ती के बीच भावनाओं की नर्मी, अनुशासन के बीच अपनापन और उत्सव की हलचल में छुपी विदाई की कसक साफ़ महसूस की जा रही थी। जिला पुलिस अधीक्षक हरिशंकर अपने नए दायित्व के लिए श्रीगंगानगर रवाना हो रहे थे। उनके स्थानांतरण के अवसर पर पुलिस मुख्यालय में आयोजित विदाई समारोह सम्मान, आत्मीयता और भावनाओं का अनूठा संगम बन गया। सुबह से ही पुलिस मुख्यालय परिसर में चहल-पहल दिखाई देने लगी थी। अधिकारी और जवान अपने कप्तान को सम्मान देने के लिए उत्साह के साथ एकत्रित हुए थे।














कार्यक्रम की शुरुआत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अरविंद तथा डीएसपी मीनाक्षी द्वारा एसपी हरिशंकर को साफ़ा और श्रीफल भेंट कर की गई। राजस्थान की आन-बान-शान का प्रतीक साफ़ा जब उनके सिर पर सजाया गया तो पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सम्मान की इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्हें पारंपरिक अंदाज़ में घोड़ी पर बिठाया गया। यह दृश्य केवल एक रस्म भर नहीं था, बल्कि उस सम्मान और विश्वास का प्रतीक था जो उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अपने सहयोगियों के बीच अर्जित किया था। जैसे ही डीजे पर ‘हो जाएगी तेरी बल्ले-बल्ले’ गीत गूंजा, पुलिसकर्मियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। जवान और अधिकारी थिरकते हुए अपने कप्तान को विदाई दे रहे थे। तालियों की गूंज और नाचते कदमों के बीच यह विदाई समारोह उत्सव का रूप ले चुका था। कुछ दूरी तक एसपी हरिशंकर घोड़ी पर सवार होकर आगे बढ़े। यह दृश्य मानो उस नेतृत्व का प्रतीक बन गया जिसमें उन्होंने हमेशा अपनी टीम के साथ कदम से कदम मिलाकर काम किया। उनके साथ चल रहे पुलिसकर्मी गर्व और आत्मीयता से भरे दिखाई दे रहे थे। हालांकि, हर उत्सव की तरह इस विदाई में भी भावनाओं की एक गहरी परत छुपी हुई थी। जैसे ही श्रीगंगानगर के लिए रवाना होने का समय आया और एसपी हरिशंकर वाहन में बैठने लगे, माहौल अचानक भावुक हो गया। अभी तक जो चेहरे मुस्कान से खिले हुए थे, उनकी आंखें नम हो गईं। कई पुलिसकर्मियों की पलकों पर ठहरे आंसू बिना कुछ कहे बहुत कुछ बयान कर रहे थे।

यह विदाई औपचारिक नहीं थी, बल्कि दिल से दी गई रुख़्सती थी। इस दौरान एसपी हरिशंकर भी भावनाओं से भर आए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हनुमानगढ़ में बिताया गया समय उनके जीवन के यादगार अध्यायों में शामिल रहेगा। उन्होंने कहा, “हनुमानगढ़ के लोगों को मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं, कानून का पालन करने वाले हैं और एक-दूसरे का सम्मान करना जानते हैं। मेरी दुआ है कि हनुमानगढ़ के लोग हमेशा स्वस्थ और खुशहाल रहें।” उन्होंने अपने करीब दस माह के कार्यकाल को याद करते हुए हनुमानगढ़ पुलिस को एक मेहनती, अनुशासित और अनुभवी टीम बताया। उन्होंने कहा कि जिले के स्थापित स्टाफ की कार्यकुशलता और समर्पण के कारण कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ नशा तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने में भी सफलता मिली।

उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पूरी टीम की तत्परता और जिम्मेदारी के कारण मुख्यालय से किसी कार्य में देरी की शिकायत कभी सामने नहीं आई। साथ ही उन्होंने हनुमानगढ़ जिले की जागरूक जनता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आमजन के सहयोग के कारण पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय बना रहा, जो किसी भी जिले की कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विदाई समारोह के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अरविंद, डीएसपी मीनाक्षी सहारण, सीओ कर्ण सिंह, जंक्शन थाना प्रभारी रामचंद्र कस्वां, यातायात थाना प्रभारी अनिल चिंदा सहित अन्य अधिकारियों और कार्मिकों ने भी एसपी हरिशंकर के कार्यकाल की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि उनके नेतृत्व में पुलिस विभाग ने केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि टीमवर्क और भरोसे की ऐसी मिसाल कायम की जिसने पूरे महकमे को नई ऊर्जा दी।

पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने बातचीत में उन्हें एक कुशल रणनीतिकार और बेहतरीन टीम लीडर बताया। उनका कहना था कि एसपी हरिशंकर सख़्ती और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने में माहिर हैं। वे अनुशासन के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण से भी काम करते हैं, जिससे पुलिस बल के भीतर विश्वास और आत्मीयता का माहौल बना रहता है। एक अधिकारी ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वे आदेश देने के बजाय टीम को प्रेरित करके काम करवाने में विश्वास रखते थे। यही कारण रहा कि उनके नेतृत्व में तैयार हुई टीम ने हर मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया। चाहे फील्ड ऑपरेशन की बात हो या विभागीय समन्वय की, हर स्तर पर एकजुटता और आत्मविश्वास देखने को मिला। अपने संबोधन में एसपी हरिशंकर ने पुलिसकर्मियों को भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि हर अधिकारी और कर्मचारी को टीम भावना के साथ काम करना चाहिए और समय का सदुपयोग करते हुए स्व-प्रेरणा से कार्य करने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने ‘सेल्फ-टास्किंग’ यानी स्व-प्रेरित कार्यशैली को पुलिस विभाग की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि जब कोई कर्मचारी अपने कर्तव्य को केवल आदेश नहीं बल्कि जिम्मेदारी समझकर निभाता है, तभी संगठन की असली ताकत सामने आती है। उन्होंने विश्वास जताया कि हनुमानगढ़ पुलिस आने वाले समय में भी इसी समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी। समारोह के अंत में जिला मुख्यालय के थानाधिकारी, शाखा प्रभारी, संचित निरीक्षक और मंत्रालयिक कर्मचारियों ने भी अपने कप्तान को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। सभी ने उन्हें भावनाओं और सम्मान के साथ विदा किया।

हनुमानगढ़ पुलिस मुख्यालय में आयोजित यह विदाई समारोह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रहा, बल्कि एक ऐसे अधिकारी के प्रति सम्मान और स्नेह का प्रतीक बन गया जिसने अपने कार्यकाल के दौरान अपने सहयोगियों के दिलों में विशेष स्थान बनाया।


अब हरिशंकर श्रीगंगानगर में नई जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। हनुमानगढ़ में उनका कार्यकाल भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन उनके नेतृत्व की शैली, कार्य के प्रति समर्पण और मानवीय दृष्टिकोण की यादें लंबे समय तक पुलिस महकमे और जिले के लोगों के बीच जीवित रहेंगी। यह विदाई दरअसल एक नए सफर की शुरुआत है—उस अधिकारी के लिए जिसने वर्दी के साथ-साथ दिलों की हिफाजत करना भी बखूबी सीखा।
