हनुमानगढ़। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला श्रमिकों एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के अधिकारों, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय मजदूर संघ, जिला हनुमानगढ़ की ओर से राजस्थान सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया गया। यह ज्ञापन प्रदेशाध्यक्ष भाजपा महिला मोर्चा राखी राठौड़ के माध्यम से राज्य सरकार तक पहुंचाने के लिए दिया गया है। भारतीय मजदूर संघ द्वारा 8 मार्च से 15 मार्च 2026 तक “महिला अधिकार सप्ताह” मनाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत महिला श्रमिकों के अधिकारों और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर यह पहल की गई है। संगठन का कहना है कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाएं देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं, लेकिन उन्हें अब भी अपेक्षित सुविधाएं, सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ज्ञापन में कहा गया कि आज कारखानों, उद्योगों, कृषि, सेवा क्षेत्र और असंगठित क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्य कर रही हैं। इसके अलावा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं भी समाज के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक, बाल विकास और पोषण से जुड़ी सेवाओं को संचालित कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय, सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, समान अवसर और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना समय की बड़ी आवश्यकता है। भारतीय मजदूर संघ ने ज्ञापन के माध्यम से महिला श्रमिकों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें सभी क्षेत्रों में “समान कार्य के लिए समान वेतन” की व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की मांग प्रमुख है। इसके साथ ही सभी कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। संगठन ने कहा कि महिलाओं के लिए कार्यस्थलों पर क्रेच (पालना घर) की सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि कामकाजी महिलाओं को अपने बच्चों की देखभाल को लेकर किसी प्रकार की परेशानी न हो। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए बने पॉश अधिनियम का सभी सरकारी और निजी संस्थानों में कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा महिला श्रमिकों को स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व अवकाश तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जाना चाहिए। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को भी पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़े जाने की आवश्यकता बताई गई है। संगठन ने महिलाओं के विरुद्ध बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके खिलाफ प्रभावी रोक लगाने और सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही महिलाओं को शिक्षा, कौशल विकास और स्वरोजगार के लिए विशेष योजनाएं संचालित करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि वे आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सकें। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से संबंधित मांगों का भी ज्ञापन में विशेष उल्लेख किया गया है। भारतीय मजदूर संघ ने मांग की है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही उनके मानदेय में वृद्धि कर उन्हें सम्मानजनक वेतन प्रदान किया जाए। संगठन का कहना है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी मिलना चाहिए। इसके अलावा आंगनवाड़ी केंद्रों पर कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित कार्यस्थल और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है, ताकि वे अपने कार्यों को बेहतर तरीके से निभा सकें। इस दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। ज्ञापन की प्रतिलिपि भारतीय मजदूर संघ राजस्थान प्रदेश के अध्यक्ष और महामंत्री को भी भेजी गई है। इस अवसर पर जिला मंत्री संदीप सिरावता, प्रदेश महामंत्री इंद्राज घोटिया, प्रदेश उपाध्यक्ष ओम गोदारा, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गुरमुख सिंह, जिलाध्यक्ष लेखराम योगी, महामंत्री मनोजराव, संगठन मंत्री संदीप झोरड़, रोडवेज संभाग अध्यक्ष सुरेंद्र करीर सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि महिला शक्ति ही राष्ट्र की शक्ति है और महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा तथा सम्मान की रक्षा करना समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर सकारात्मक कदम उठाएगी।
