– पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी बोले-नियम विरुद्ध चिकित्सा करना दंडनीय अपराध, समय-समय पर हो सघन जांच
हनुमानगढ़। राजकीय प्राकृतिक चिकित्सालय हनुमानगढ़ के पूर्व वरिष्ठ चिकित्सक, पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं राजस्थान सरकार के नेचुरोपैथी एवं योग सलाहकार रहे वैद्य शिवकुमार शर्मा ने प्रदेशभर में अपंजीकृत व्यक्तियों द्वारा चिकित्सा प्रैक्टिस किए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए नियमित जांच और कड़ी कार्रवाई आवश्यक है। वैद्य शर्मा ने कहा कि केवल हनुमानगढ़ ही नहीं, बल्कि राजस्थान के अधिकांश शहरों और गांवों में भी अपंजीकृत व्यक्ति चिकित्सा कार्य कर रहे हैं। इससे पंजीकृत और योग्य चिकित्सकों की उपेक्षा हो रही है, वहीं आमजन भी भ्रमित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग बिना निर्धारित योग्यता और पंजीकरण के चिकित्सा से संबंधित दुकानें या केंद्र संचालित कर रहे हैं, जो नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, नेचुरोपैथी एवं योग सहित विभिन्न चिकित्सा पद्धतियां कानून के तहत संचालित हैं और प्रत्येक पद्धति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यताएं एवं नियम तय हैं। डिग्रीधारी एवं पंजीकृत चिकित्सकों को अपनी-अपनी चिकित्सा पद्धति की सीमाओं में रहकर ही उपचार करना चाहिए। अधिकांश चिकित्सक नियमों का पालन करते हैं, लेकिन कुछ अपंजीकृत लोग इन पद्धतियों की आड़ लेकर चिकित्सा कार्य करने लगते हैं, जिसका नुकसान समाज को उठाना पड़ता है। वैद्य शर्मा ने कहा कि समाज में भी जागरूकता की आवश्यकता है ताकि लोग योग्य और पंजीकृत चिकित्सकों से ही उपचार लें। उन्होंने कहा कि यदि शासन-प्रशासन का भय और नियमित निगरानी बनी रहे तो ऐसे लोग नियम विरुद्ध कार्य करने से बचेंगे। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या पर भी चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान में युवा पीढ़ी तेजी से नशे की गिरफ्त में जा रही है। इससे समाज पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं। नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की आवश्यकता है, जिससे लोगों में जागरूकता बढ़े और इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके। वैद्य शर्मा ने बताया कि किसी व्यक्ति के पास यदि मान्यता प्राप्त डिग्री, डिप्लोमा या प्रमाण पत्र नहीं है और वह संबंधित चिकित्सा पद्धति में पंजीकृत नहीं है, तो वह अपंजीकृत माना जाएगा। ऐसे मामलों की जांच करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अपंजीकृत व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए रजिस्ट्रार, इंडियन मेडिसिन बोर्ड जयपुर सक्षम प्राधिकारी है। बोर्ड समय-समय पर विभागीय अधिकारियों को निर्देश और विज्ञप्तियां जारी करता है कि अपंजीकृत व्यक्तियों द्वारा चिकित्सा कार्य करना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए विभिन्न प्रकार की सजाओं का प्रावधान है। वैद्य शिवकुमार शर्मा ने सुझाव दिया कि संबंधित विभागों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करते हुए नियमित जांच अभियान चलाने चाहिए। इससे जिले में चिकित्सा व्यवस्था की स्वच्छ छवि बनेगी और आमजन को सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध हो सकेगा।
फर्जी फिजियोथैरेपिस्ट बने बैठे लोग कर रहे प्रैक्टिस
डॉ. संदीप सिहाग ने कहा कि समाचार पत्रों में पढ़ने को मिल रहा है कि प्रैक्टिस करने वाले अपंजीकृत लोगों के खिलाफ जयपुर-कोटा में कार्रवाई हुई है। उन्होंने बताया कि सतीपुरा बाइपास, चूना फाटक सहित आठ से दस जगहों पर फर्जी फिजियोथैरेपिस्ट बने बैठे लोग प्रैक्टिस कर रहे हैं। लोग भी उनसे चिकित्सा सुविधा का लाभ ले रहे हैं। उनकी मांग है कि हनुमानगढ़ में भी फर्जी फिजियोथैरेपिस्ट बने बैठे लोगों पर एक्शन लिया जाए।

साथ ही आमजन से अपील की कि वे ऐसे लोगों से उनकी डिग्री की जानकारी लो। क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। सस्ती चिकित्सा सुविधा के लालच में लोग अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे अपंजीकृत व अप्रशिक्षित लोगों की वजह से बीमारी और बढ़ जाती है। लोगों को इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सीएमएचओ से लिखित में शिकायत कर मांग की गई है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि जल्द ही दोबारा सीएमएचओ से मुलाकात कर कार्रवाई करने की मांग की जाएगी।
