हनुमानगढ़। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय गोलूवाला के वृक्ष मित्र एवं मानव सेवा संस्थान ने अब प्लास्टिक और पॉलीथिन के बढ़ते उपयोग पर अंकुश लगाने के लिए वृक्षमित्र थैला जागृति अभियान शुरू किया है। संस्थान के स्थापना दिवस के मौके पर शुक्रवार को इस अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस मौके पर संस्थान के सदस्य जिला मुख्यालय पहुंचे और जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव से मुलाकात कर अभियान की जानकारी दी। संस्थान की ओर से तैयार करवाए गए कपड़े के थैले का विमोचन भी जिला कलक्टर ने किया। जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्लास्टिक और पॉलीथिन का दुष्प्रभाव पशु-पक्षियों के साथ-साथ पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में गोवंश पॉलीथिन निगलने के कारण असमय मौत का शिकार हो जाते हैं। वहीं बारिश के मौसम में नाले और नालियां भी प्लास्टिक कचरे से अवरुद्ध हो जाती हैं। उन्होंने व्यापारियों से आह्वान किया कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर खरीदारी करने आने वाले ग्राहकों को कपड़े के बैग उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करें तथा नागरिक भी खरीदारी के लिए घर से निकलते समय अपने साथ जूट या कपड़े का थैला लेकर चलें। उपखंड अधिकारी मांगीलाल सुथार ने कहा कि वृक्ष मित्र एवं मानव सेवा संस्थान पिछले कई वर्षांे से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि कपड़े के थैले के उपयोग को बढ़ावा देने की यह मुहिम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी कदम साबित होगी। प्रशासन की ओर से भी इस अभियान को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। संस्थान के अध्यक्ष नरेन्द्र सुथार ने बताया कि संस्था पिछले आठ वर्षांे से पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रही है। स्थापना दिवस के मौके पर कपड़े के कैनवस बैग की शुरुआत इसी उद्देश्य से की गई है ताकि पॉलीथिन के उपयोग को कम किया जा सके और लोगों को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि संस्थान की ओर से हर वर्ष पक्षियों के संरक्षण के लिए लगभग एक हजार लकड़ी के घोंसले लगाए जाते हैं। इसके अलावा गर्मी के मौसम में पक्षियों के लिए एक हजार परिंडे भी विभिन्न स्थानों पर लगाए जाते हैं, जिनकी देखरेख के लिए उन्हें गोद देने की व्यवस्था की जाती है। नरेन्द्र सुथार ने बताया कि संस्थान अब तक 40 हजार से अधिक पौधे रोप चुका है और उनके संरक्षण के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही संभव है। इसी सोच के साथ संस्थान आने वाले समय में भी जागरूकता अभियानों को जारी रखेगा। इस मौके पर संस्थान के बृजलाल छिम्पा, जगतार सिंह, मनोज देपावत, मदन ठाकुर, नरेश सिहाग, राजविन्द्र सिंह, सुमेर डाबला, संजय छिम्पा, शिवकुमार, प्रेम वर्मा, दीपराम, चंद्र प्रकाश, जयंत, रामखिलाड़ी बैरवा, अमित, राकेश, मनेंद्र सिंह मौजूद रहे।
