हनुमानगढ़। विप्र फाउंडेशन ने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के हितों की रक्षा एवं संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ईडब्ल्यूएस वर्ग को स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व देने तथा राज्य स्तर पर स्वतंत्र ईडब्ल्यूएस आयोग के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई गई। जिलाध्यक्ष कालूराम शर्मा ने कहा कि संविधान के 103वें संशोधन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को शिक्षा एवं सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण का संवैधानिक अधिकार प्रदान किया गया है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को समान अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। हालांकि, जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था का लाभ अभी भी सभी पात्र लोगों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। पात्रता, प्रमाण-पत्र निर्माण, आय सीमा की व्याख्या तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण अनेक पात्र परिवार अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। विप्र फाउंडेशन ने मांग की कि संविधान की भावना के अनुरूप आगामी पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों में ईडब्ल्यूएस वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण का प्रावधान किया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में भी प्रभावी भागीदारी निभा सके। इसके साथ ही राजस्थान में एक स्वतंत्र एवं सशक्त ईडब्ल्यूएस आयोग के गठन की मांग भी की गई। प्रस्तावित आयोग को ईडब्ल्यूएस की आय सीमा एवं पात्रता मानकों की समय-समय पर समीक्षा करने, प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने, आरक्षण एवं योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करने, पात्र नागरिकों की शिकायतों का त्वरित एवं निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करने तथा राज्य सरकार को आवश्यक नीतिगत सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपने का आग्रह किया गया। विप्र फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री से मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए आवश्यक निर्णय लेने का अनुरोध किया है। संगठन का कहना है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लाखों परिवारों को संवैधानिक अधिकारों का वास्तविक लाभ मिल सकेगा और उन्हें न्याय एवं समान अवसर प्राप्त होंगे। इस मौके पर विप्र फाउंडेशन युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष सचिन कौशिक, डॉ. भारत भूषण शर्मा, हंसराज शर्मा, नरेश पुरोहित, गोपाल शर्मा, बलदेव सारस्वत, लोकेश शर्मा, वेद तिवाड़ी, महेश शर्मा, एलडी तावनिया, देवीलाल शर्मा मौजूद थे।
