हनुमानगढ़। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में जिला पुलिस द्वारा एक सराहनीय और तकनीक-आधारित पहल की गई है। इस पहल के तहत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से जुड़ी राजस्थान रोडवेज और हरियाणा रोडवेज की बसों में विशेष क्यूआर कोड चस्पा किए गए हैं। इन क्यूआर कोड को स्कैन करते ही यात्री सीधे पुलिस सहायता से जुड़ सकेंगे। यह कदम विशेष रूप से महिलाओं, छात्राओं, बुजुर्गों और अकेले यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

यह पहल जिला पुलिस अधीक्षक हरिशंकर के निर्देशानुसार और पुलिस मुख्यालय से प्राप्त दिशा-निर्देशों के तहत लागू की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को पुलिस सहायता प्राप्त करने में देरी न हो और वे बिना किसी झिझक के तुरंत संपर्क कर सकें। आधुनिक तकनीक के उपयोग से यह व्यवस्था न केवल त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती है, बल्कि पुलिस और आमजन के बीच विश्वास को भी मजबूत करती है।
क्यूआर कोड से सीधे पुलिस तक पहुंच
यातायात थाना प्रभारी अनिल चिंदा ने जानकारी देते हुए बताया कि इन क्यूआर कोड को स्कैन करने पर नागरिक राजस्थान राजकोप सिटीजन एप से सीधे जुड़ जाते हैं। यह एप राजस्थान पुलिस की एक डिजिटल पहल है, जिसके माध्यम से नागरिक घर बैठे या यात्रा के दौरान भी पुलिस सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। एप का इंटरफेस सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल है, ताकि तकनीकी जानकारी सीमित होने पर भी कोई व्यक्ति आसानी से इसका उपयोग कर सके।

उन्होंने बताया कि यदि किसी महिला या पुरुष को यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की आपात स्थिति का सामना करना पड़ता है- जैसे महिला उत्पीड़न, छेड़छाड़, साइबर फ्रॉड, साइबर क्राइम, ठगी, संदिग्ध गतिविधि या किसी अन्य अपराध की आशंका- तो वह तुरंत क्यूआर कोड स्कैन कर शिकायत दर्ज कर सकता है। शिकायत दर्ज होते ही संबंधित थाना और पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिल जाती है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है।
10 प्रमुख सुविधाओं से लैस राजकोप सिटीजन एप
यातायात थाना प्रभारी के अनुसार, राजस्थान राजकोप सिटीजन एप में आमजन के लिए कुल 10 प्रकार की महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें ऑनलाइन शिकायत दर्ज करना, आपातकालीन सहायता, महिला सुरक्षा से जुड़ी सेवाएं, साइबर अपराध की रिपोर्टिंग, खोया-पाया, सत्यापन सेवाएं और पुलिस से संबंधित अन्य जरूरी जानकारियां शामिल हैं।

इन सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों को बार-बार थाने के चक्कर लगाने से बचाना और पारदर्शी व जवाबदेह पुलिसिंग को बढ़ावा देना है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से पुलिस न केवल शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई कर पा रही है, बल्कि मामलों की ट्रैकिंग और फॉलो-अप भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। इससे पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आती है और आमजन का भरोसा बढ़ता है।
सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक जागरूकता अभियान
रविवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में जंक्शन के बस स्टैंड, टैक्सी स्टैंड, टेंपो स्टैंड सहित जिले के विभिन्न प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर इन क्यूआर कोड को लगाया गया। इस दौरान पुलिस कर्मियों ने यात्रियों, विशेषकर महिलाओं को क्यूआर कोड के उपयोग की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार आपात स्थिति में केवल मोबाइल फोन से क्यूआर कोड स्कैन कर तुरंत पुलिस सहायता प्राप्त की जा सकती है।

पुलिस द्वारा चलाए गए इस जागरूकता अभियान को यात्रियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। कई महिलाओं और यात्रियों ने इसे एक उपयोगी और समयानुकूल पहल बताते हुए कहा कि इससे यात्रा के दौरान सुरक्षा का एहसास बढ़ेगा।
महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शुरू की गई यह पहल महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक मजबूत संदेश देती है।

सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं को देखते हुए यह व्यवस्था उन्हें न केवल त्वरित सहायता प्रदान करती है, बल्कि अपराधियों में भी कानून का भय उत्पन्न करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की तकनीकी पहलें अपराध रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
आमजन से सहयोग की अपील
यातायात थाना प्रभारी अनिल चिंदा ने आमजन से अपील की कि वे बसों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए इन क्यूआर कोड को अवश्य देखें, समझें और अपने परिवार, मित्रों व आसपास के लोगों को इसके बारे में जानकारी दें।

उन्होंने कहा कि किसी भी सुरक्षा व्यवस्था की सफलता तभी संभव है, जब उसमें आमजन की सक्रिय भागीदारी हो। पुलिस हर समय जनता की सुरक्षा के लिए तत्पर है, लेकिन नागरिकों की सजगता और सहयोग इसे और अधिक प्रभावी बनाता है।
तकनीक और पुलिसिंग का सफल समन्वय
कुल मिलाकर, राजस्थान और हरियाणा रोडवेज बसों में क्यूआर कोड लगाने की यह पहल आधुनिक तकनीक और सामुदायिक पुलिसिंग का एक सफल उदाहरण है। यह न केवल महिलाओं और यात्रियों की सुरक्षा को सुदृढ़ करती है, बल्कि पुलिस व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाती है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में अन्य जिलों और राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकती है।
