हनुमानगढ़। नोहर तहसील के गांव टिडियासर में वन विभाग की ओर से जारी किए गए नोटिसों ने सैकड़ों ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। विभाग की ओर से वन भूमि पर अतिक्रमण के आरोप में करीब 176 ग्रामीणों को नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। मामले के विरोध में बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला मुख्यालय स्थित उप वन संरक्षक कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन कर रोष जताया। ग्रामीण सुनील कुमार और हरलाल जाट ने बताया कि टिडियासर गांव में लगभग 700 घरों की आबादी निवास करती है। उनका कहना है कि गांव वर्ष 1957 से बसा हुआ है, जबकि वन विभाग का गठन बाद में हुआ।

ऐसे में वन भूमि पर अतिक्रमण का आरोप तथ्यहीन है। ग्रामीणों का दावा है कि उनके पास वर्षां से निवास के प्रमाण स्वरूप राशन कार्ड, बिजली बिल, पानी के बिल और अन्य सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं। इसके अलावा वे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी नियमित रूप से ले रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन की ओर से उन्हें वैध निवासी के रूप में स्वीकार किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2000 में श्रीगंगानगर के तत्कालीन जिला कलक्टर की ओर से जारी एक पत्र के आधार पर इस क्षेत्र को वन विभाग की भूमि घोषित कर दिया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय जमीनी स्थिति का सही आकलन नहीं किया गया और पहले से बसी आबादी को नजरअंदाज कर दिया गया। उनका कहना है कि आबादी बढ़ने के साथ ग्रामीणों ने इस भूमि को पंचायत की जमीन मानकर अपने मकान बनाए थे। विभाग को समय रहते स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी, लेकिन अब कई दशक बाद कार्रवाई की जा रही है।
पेशी में सौंपा जवाब, आंदोलन की चेतावनी
वन विभाग की ओर से जारी नोटिस में बुधवार को पेशी की तारीख निर्धारित की गई थी। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से उपस्थित होकर विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखा और दस्तावेज प्रस्तुत किए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें बेदखल करने या मकान तोड़ने की कार्रवाई की गई तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वन विभाग के अधिकारियों को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा और किसी भी ग्रामीण का घर नहीं टूटने दिया जाएगा।
मतदान बहिष्कार तक की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी वर्षांे पुरानी बस्ती को उजाड़ने का प्रयास किया गया तो वे आंदोलन को उग्र रूप देंगे। जरूरत पड़ने पर आगामी चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए वास्तविक स्थिति का पुन: सर्वे करवाए और दशकों से बसे लोगों को राहत प्रदान करे।
