– आईएमए के नेशनल वाइस प्रेजीडेंट बोले- एसओपी को कानून का रूप देकर कठोर धाराओं में दर्ज हों मुकदमे, जरूरत पड़ी तो मामला राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे
हनुमानगढ़। बीकानेर में डॉ. तनवीर मालावत के साथ हुए घटनाक्रम को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के नेशनल वाइस प्रेजीडेंट डॉ. एमपी शर्मा ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताया है। उन्होंने कहा कि डॉ. तनवीर बेहद अनुभवी सर्जन हैं और हजारों ऑपरेशन कर चुके हैं। पूरे घटनाक्रम के कारणों की उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में चिकित्सक के साथ मारपीट और अस्पताल में तोड़फोड़ को उचित नहीं ठहराया जा सकता। डॉ. शर्मा ने कहा कि चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर आईएमए लगातार प्रयास कर रही है। राजस्थान में चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए एसओपी बनी हुई है, लेकिन आईएमए की मांग है कि इस एसओपी को कानून का रूप दिया जाए। इसका गजट नोटिफिकेशन हो तथा चिकित्सकों के साथ मारपीट और अस्पताल में तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कठोर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाएं। उन्होंने कहा कि जैसे ही चिकित्सक की ओर से एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी, आईएमए बीकानेर ब्रांच और आईएमए राजस्थान उनके साथ खड़ी रहेगी। जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सरकार के साथ इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने को लेकर पहले भी कई बार वार्ता हो चुकी है। डॉ. शर्मा ने कहा कि इलाज के दौरान कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं और कोई चिकित्सक जानबूझकर मरीज का नुकसान नहीं करता। यदि मरीज के परिजनों को लगता है कि इलाज में कुछ गलत हुआ है तो उन्हें कानून का रास्ता अपनाना चाहिए। मारपीट या तोड़फोड़ किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने चिंता जताई कि इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ने से छोटे शहरों और कस्बों में चिकित्सक गंभीर मरीजों का इलाज करने से भी घबराने लगेंगे। इससे मरीजों को ही नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आईएमए लगातार सरकार के समक्ष अपनी बात रख रही है। डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रशासन को भी बीकानेर के मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए दोषियों को डिटेन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईएमए की ओर से चिकित्सकों के हित में अन्य मांगें भी सरकार के समक्ष रखी जाती हैं, लेकिन कई बार उन मांगों में भी चिकित्सकों को ही दोषी ठहरा दिया जाता है। चिकित्सकों पर हर मामले का दोष नहीं डाला जा सकता। उन्होंने सरकार से विभिन्न चिकित्सा योजनाओं के तहत उपचार के लिए उचित पैकेज रेट निर्धारित करने की मांग भी की।
