हनुमानगढ़। दलित समाज के युवकों के साथ कथित पुलिस मारपीट और उत्पीड़न के आरोपों को लेकर शुक्रवार को जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर गोलूवाला हंसलिया के ग्रामीणों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गोलूवाला थाना पुलिस ने दलित समाज के युवक अमरजीत बावरी को चोरी के एक कथित झूठे मामले में हिरासत में लेकर बेरहमी से मारपीट की और गंभीर प्रताड़ना दी। ग्रामीणों के अनुसार पुलिस पिटाई से अमरजीत की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे पहले पीलीबंगा और फिर हनुमानगढ़ के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। आरोप है कि बाद में उसे बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।

इसी तरह, दलित समाज के रामपाल नायक को धरना स्थल से उठाकर गोलूवाला थाने ले जाने, वहां उसके साथ बुरी तरह मारपीट करने और उल्टा लटकाने के आरोप भी लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा जातिसूचक गालियां भी दी गईं। बताया गया कि रामपाल नायक ने कुछ दिन पहले एक पुलिसकर्मी के नशे की हालत में होने का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसके बाद से उसे निशाना बनाया जा रहा था। धरना स्थल पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने पुलिस कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की। धरने के बाद प्रदर्शनकारियों ने एसपी कार्यालय के बाहर नारेबाजी की। काफी देर तक चली समझाइश के बाद जिला पुलिस अधीक्षक हरिशंकर ने प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया।

वार्ता में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अरविंद कड़वासरा, डीवाईएसपी मीनाक्षी सहारण सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने एसपी को वीडियो और फोटो साक्ष्य सौंपते हुए आरोप लगाया कि अमरजीत बावरी द्वारा ज्ञापन दिए जाने के अगले ही दिन सुबह करीब चार बजे पुलिस उसके घर पहुंची, परिवार के साथ अभद्र व्यवहार किया और महिलाओं के साथ गाली-गलौज करते हुए तलाशी ली। इस पर एसपी ने दोनों मामलों को गंभीर बताते हुए कहा कि पांच दिन के भीतर जांच पूरी कर ली जाएगी और यदि पुलिसकर्मी दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सभा को संबोधित करते हुए कामरेड रामेश्वर वर्मा ने कहा कि जिले में अपराध बढ़ रहे हैं और पुलिस की कथित गुंडागर्दी से आमजन में भय का माहौल बन रहा है।

मास्टर जसविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि ज्ञापन देने के बाद ही परिवादी परिवारों पर दबाव बनाने के लिए छापेमारी की जा रही है। एडवोकेट रघुवीर वर्मा ने इसे दलित समाज पर पुलिसिया दमन बताते हुए आर-पार की लड़ाई का आह्वान किया। अंत में प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो 9 मार्च से जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, हनुमानगढ़ पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन में विभिन्न समाजों और संगठनों के अनेक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
