– पैदल मार्च निकालकर लगाए पाकिस्तान विरोधी नारे- राष्ट्रपति को ज्ञापन भेज दोषियों पर कार्रवाई और गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण की उठाई मांग
हनुमानगढ़। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फारूकाबाद (मंडी चुहड़काना) स्थित करीब 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री सिंह सभा साहिब को ध्वस्त किए जाने की घटना के विरोध में शुक्रवार को गोलूवाला में सिख संगत सड़कों पर उतर आई। सिख समुदाय ने पैदल मार्च निकालकर घटना के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया और उपतहसील कार्यालय पहुंचकर भारत की राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। पैदल मार्च गोलूवाला के मुख्य बाजार से होकर उपतहसील कार्यालय तक निकाला गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए घटना की कड़ी निंदा की और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। उपतहसील कार्यालय पहुंचने पर सिख प्रतिनिधिमंडल ने उपतहसीलदार के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसी भी धर्मस्थल को तोड़ना अमानवीय और असभ्य कृत्य है। सिख समुदाय पूरी दुनिया में शांति, सेवा और भाईचारे का संदेश देता है, लेकिन उसके धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जाना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस घटना ने विश्वभर के सिख समाज की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है। ज्ञापन में कहा गया कि ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री सिंह सभा साहिब को ध्वस्त किया जाना करोड़ों सिख श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था पर गंभीर आघात है। यह घटना केवल एक धार्मिक स्थल पर हमला नहीं, बल्कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। सिख संगत ने राष्ट्रपति के माध्यम से भारत सरकार से मांग की कि इस गंभीर मामले को पाकिस्तान सरकार के समक्ष कड़े शब्दों में उठाया जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए, गुरुद्वारा श्री सिंह सभा साहिब का पुनर्निर्माण कराया जाए तथा पाकिस्तान में रह रहे सिख एवं अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कूटनीतिक प्रयास किए जाएं।
