हनुमानगढ़। टाउन क्षेत्र में स्थित नेहरू उद्यान, जो कभी अपनी हरियाली, सुंदरता और जीवंत माहौल के कारण शहर की पहचान माना जाता था, आज उपेक्षा और अव्यवस्था की मार झेल रहा है। शहर का सबसे बड़ा और पुराना पार्क होने के बावजूद वर्तमान में इसकी स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। रख-रखाव के अभाव, सुरक्षा व्यवस्था की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते यह उद्यान धीरे-धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एक समय ऐसा था जब रविवार को यहां मेले जैसा दृश्य देखने को मिलता था। सुबह-शाम परिवारों की चहल-पहल, बच्चों की किलकारियां, युवाओं की खेल गतिविधियां और बुजुर्गांे की बैठकों से यह पार्क गुलजार रहता था।

लेकिन अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि यहां न नियमित सफाई दिखाई देती है और न ही पौधों व सुविधाओं की देखभाल।
छह माह से बंद पड़ी मोटर, सूख रही हरियाली
बुधवार को शहर के कुछ जागरूक नागरिक पार्क में एकत्रित हुए और नगर परिषद की अनदेखी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। अमजद खान और जितेन्द्र सुखीजा ने बताया कि नेहरू पार्क में जितनी विविध वनस्पति और पेड़-पौधे हैं, उतने शायद ही शहर के किसी अन्य पार्क में हों।

इसके बावजूद पिछले करीब छह माह से पानी की मोटर बंद पड़ी है। मोटर बंद होने से पौधों को समय पर पानी नहीं मिल पा रहा, जिससे हरियाली पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस संबंध में नगर परिषद अधिकारियों को अवगत करवाया जाता है तो उनका जवाब होता है कि नागरिक स्वयं मोटर की मरम्मत करवा लें। नागरिकों ने सवाल उठाया कि यदि सभी जिम्मेदारियां जनता को ही निभानी हैं तो अधिकारियों को कुर्सी पर बैठाने का औचित्य क्या है?
खतरे में बच्चों-महिलाओं की सुरक्षा
नागरिकों ने बताया कि पार्क से सटे स्कूल का बड़ा गेट खुला रहने के कारण निराश्रित पशुओं का जमावड़ा बना रहता है। कई बार संस्था प्रधान को इस समस्या से अवगत करवाया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब पार्क में नशेड़ी प्रवृत्ति के लोगों का आना-जाना बढ़ जाता है।

पार्क परिसर में शराब की खाली बोतलें, चिट्टा सेवन में प्रयुक्त सिरिंज और अन्य नशीले पदार्थां के अवशेष शौचालयों व कोनों में पड़े मिलते हैं। इससे न केवल वातावरण दूषित हो रहा है, बल्कि पार्क में आने वाले बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है।
फव्वारे के पुर्जे चोरी, सुरक्षा व्यवस्था नदारद
पार्क में लगे फव्वारे के पुर्जे चोरी हो चुके हैं। सुरक्षा के नाम पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। सफाई, रख-रखाव और प्रबंधन की पूरी व्यवस्था लचर नजर आ रही है।

नागरिकों का आरोप है कि पार्क को जानबूझकर उपेक्षित छोड़ दिया गया है, मानो इसे धीरे-धीरे नष्ट करने की नीति अपनाई जा रही हो।
खेल गतिविधियों के लिए हो उपयोग
जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र प्रभावी कदम उठाकर नेहरू उद्यान की सफाई, सुरक्षा और रख-रखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि शहर की यह ऐतिहासिक धरोहर पुन: अपनी पुरानी गरिमा और रौनक प्राप्त कर सके। नागरिकों ने सुझाव दिया कि यदि नगर परिषद इस पार्क का समुचित रख-रखाव करने में असमर्थ है तो पार्क की आधी भूमि खेल गतिविधियों के लिए युवाओं को उपलब्ध करवा दी जाए।

इससे पार्क में चहल-पहल बढ़ेगी, युवाओं को सकारात्मक दिशा मिलेगी और वे नशे जैसी बुराइयों से दूर रह सकेंगे। इस मौके पर अतुल कुमार, वीरेन, प्रताप, हर्षदीप, नीरज, हैप्पी, समीर, सवाई सिंह, तुषार, वंश, जितेश, अफताब, तनीष, उदित, साहिल, रफीक मौजूद रहे।
