– नालियां और सड़कें ओवरफ्लो, लिफ्टिंग व बारदाने की कमी से बढ़ी परेशानी, व्यापारियों बोले-टैक्स देने के बावजूद नहीं मिल रहीं मूलभूत सुविधाएं
हनुमानगढ़। मानसून पूर्व हुई पहली तेज बारिश ने जंक्शन की नई अनाज मंडी में व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद मंडी परिसर की सड़कें और नालियां ओवरफ्लो हो गईं, जिससे मंडी में खुले आसमान के नीचे रखा गेहूं भीग गया। व्यापारियों और मजदूर संगठनों ने मंडी समिति की कार्यप्रणाली, लिफ्टिंग व्यवस्था और बरसाती पानी निकासी के इंतजामों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बारिश का पानी मंडी में जगह-जगह जमा होने से गेहूं की ढेरियों और गेहूं से भरे हजारों थैलों में पानी घुस गया। पिछले कुछ दिनों से कुछ दिन के अंतराल के बाद बारिश होने के बावजूद अधिकारियों की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाने से व्यापारियों में रोष है। भीगे हुए गेहूं से मंडी परिसर में दुर्गंध फैलने लगी है और खुले में पड़ा अनाज अब भी नुकसान की आशंका में है। व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष प्यारेलाल बंसल ने बताया कि नई धानमंडी में खुले में रखा गेहूं बारिश की चपेट में आने से भारी नुकसान की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस बार गेहूं खरीद व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित नजर आ रही है। कभी बारदाने की कमी तो कभी लिफ्टिंग में देरी किसानों और व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।

उन्होंने बताया कि पहले गेहूं खरीद की अंतिम तिथि 31 मई निर्धारित की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 6 जून, फिर 12 जून और अब 19 जून तक किया गया है। इसके बावजूद पर्याप्त बारदाना उपलब्ध नहीं होने से गेहूं की तुलाई प्रभावित हो रही है। यदि समय पर पर्याप्त बारदाना उपलब्ध कराया जाता तो खरीद अवधि बढ़ाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। बंसल ने नई धानमंडी में जल निकासी व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि शहर का अधिकांश बरसाती पानी मंडी में पहुंचता है। नालों की सफाई और निकासी व्यवस्था उचित नहीं होने के कारण बारिश का पानी मंडी परिसर में भर जाता है और कृषि उपज को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने सरकार से शीघ्र बारदाना उपलब्ध कराने और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की। वहीं व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष जगदीश राय अग्रवाल ने बताया कि नई अनाज मंडी के यार्ड नम्बर 2 की सड़कें 30 से 35 वर्ष पुरानी हैं और पिछले कई वर्षांे से उनके नवीनीकरण के लिए कोई बजट नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि तीन वर्षांे से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस बार बारदाना वितरण और लिफ्टिंग व्यवस्था में भी पारदर्शिता दिखाई नहीं दी तथा 15 से 20 दिन की देरी से लिफ्टिंग हो रही है।
अभी भी मंडी में पड़ा लाखों थैला गेहूं

धानका तोला मजदूर यूनियन के सतपाल दामड़ी ने कहा कि गेहूं की लिफ्टिंग समय पर नहीं होने से मंडी में कृषि जिन्स का अंबार लगा हुआ है। बारिश के कारण अनाज भीग रहा है, जिससे किसानों, मजदूरों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार मंडी समिति और जिला प्रशासन को समस्या से अवगत करवाया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि वर्तमान में नई धानमंडी में करीब साढ़े तीन लाख गेहूं के थैले पड़े हुए हैं, जबकि खुले में भी बड़ी मात्रा में गेहूं रखा हुआ है। व्यापारियों का कहना है कि मंडी शुल्क और अन्य कर देने के बावजूद मंडी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण हर बारिश में मंडी परिसर जलमग्न हो जाता है और करोड़ों रुपए की कृषि उपज खतरे में पड़ जाती है। व्यापारियों ने आगाह किया कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो नई धानमंडी की कार्यप्रणाली पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
