हनुमानगढ़। हाल ही में भारतीय राजपत्र में लागू किए गए यूजीसी रेगुलेशन 2026 के विरोध में शनिवार को जंक्शन में सामान्य वर्ग की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता डॉ. निशांत बत्रा ने की। इसमें यूजीसी के नए नियमों को लेकर उत्पन्न चिंताओं पर चर्चा करते हुए आगामी रणनीति तय की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि सामान्य वर्ग की ओर से 1 फरवरी, रविवार को सुबह 11 बजे जंक्शन शहर के हृदयस्थल शहीद भगतसिंह चौक पर सांकेतिक विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।

इस दौरान आमजन को यूजीसी रेगुलेशन 2026 के प्रावधानों की जानकारी देकर जागरूक किया जाएगा। साथ ही व्यापारियों से अपील की जाएगी कि वे विरोध स्वरूप अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर समर्थन दर्ज कराएं। वक्ताओं ने कहा कि सामान्य वर्ग को पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर दोषी मानना अनुचित है। झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान लागू किए जाने चाहिए।

उन्होंने मांग की कि भेदभाव की परिभाषा को पूर्व की तरह यथावत रखा जाए और उसमें जोड़े गए जातिगत प्रावधान को हटाया जाए। वक्ताओं ने कहा कि रैगिंग एक्ट 2025 में पहले से ही स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं, ऐसे में नए नियमों से सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बैठक में भवानी शंकर शर्मा, सूर्यप्रकाश जोशी, हरीओम शर्मा, अविनाश शर्मा, भगवान सिंह खुड़ी, प्रेम दाधीच, धन्नेसिंह, डॉ. प्रेम शेखावत, नवरत्न जैन, पवन पारीक, आनन्द जोशी, राजेन्द्र जोशी, नारायण राठौड़, विजय कौशिक, कृष्ण जोशी, सतीश शर्मा, राजेन्द्र जोशी, डॉ. मनोज शर्मा, नरेन्द्र खण्डेलवाल, आशीष सक्सेना, हिमांशु मदान, कृष्णकांत परनामी, नरेश शर्मा, पवन सरावगी मौजूद रहे।

सरकार से नियम वापस लेने की मांग
धन्ने सिंह ने कहा कि सामान्य वर्ग किसी भी अन्य वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने सामान्य वर्ग के बच्चों को पूर्वाग्रह से अपराधी मान लिया है। जब भेदभाव की व्यापक परिभाषा पहले से मौजूद है जिसमें धर्म, जाति, लिंग, नस्ल और आर्थिक आधार शामिल हैं तो फिर जातिगत भेदभाव को अलग से विस्तार देने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

उन्होंने कहा कि इस रेगुलेशन में कई विसंगतियां हैं, जिनके कारण सामान्य वर्ग के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। समता समितियों में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं होना भी गंभीर विषय है। साथ ही, दोषी को खुद यह साबित करना पड़े कि उसके खिलाफ की गई शिकायत झूठी है, जो न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सरकार से यूजीसी रेगुलेशन 2026 को पूरी तरह वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि संशोधन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
