हनुमानगढ़। रामलीला बाड़ी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का सातवें एवं अंतिम दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भव्य समापन हुआ। अंतिम दिवस कथा के केंद्र में भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के मार्मिक मिलन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनकर पूरा पंडाल भक्ति-रस में सराबोर हो उठा। कथा वाचक आचार्य कृष्ण देव ने कृष्ण–सुदामा की पवित्र मित्रता का ऐसा सजीव और शास्त्रोक्त विवेचन किया कि उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। इस हृदयस्पर्शी प्रसंग के दौरान विशेष रूप से मातृशक्ति की आंखें नम हो उठीं और वातावरण “जय श्रीकृष्ण” व “राधे-राधे” के जयकारों से गूंजता रहा। बीच-बीच में प्रस्तुत भजन और संगीत ने श्रोताओं का मन मोह लिया।

कथा में यह संदेश दिया गया कि कृष्ण–सुदामा का मिलन सच्ची मित्रता, प्रेम, समर्पण और समानता का अनुपम उदाहरण है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपने निर्धन मित्र का आदर-सम्मान यह दर्शाता है कि सच्चे प्रेम और भक्ति में धन, पद या ऊँच-नीच का कोई महत्व नहीं होता। यह प्रसंग मानव जीवन में विनम्रता, स्नेह और विश्वास के साथ संबंध निभाने की प्रेरणा देता है। पूरे आयोजन की व्यवस्था आचार्य दयानन्द महाराज एवं जीतू पंडित द्वारा सुव्यवस्थित ढंग से संभाली गई। कार्यक्रम के मुख्य यजमान भजन लाल साहेवाल एवं उनकी पत्नी प्रेमलता साहेवाल ने कृष्ण, सुदामा एवं रुक्मिणी का विधिवत पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। नाट्य प्रस्तुति में जैबीस साहेवाल ने सुदामा का चरित्र अत्यंत जीवंत ढंग से निभाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

वहीं कृष्ण के रूप में सोनिया साहेवाल और रुक्मिणी के रूप में साक्षी साहेवाल ने भी अपने प्रभावशाली अभिनय से सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में वर्धमान सेल्स कारपोरेशन के सम्पत सिंघी एवं उनकी पत्नी संतोष देवी सिंघी, साथ ही किशन सिरसा वाले एवं उनकी पत्नी ने भी पूर्ण सहयोग प्रदान कर व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। समापन अवसर पर भजन-कीर्तन, आरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में आस्था, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
