पूर्व विधायक मटोरिया की एसपी से वार्ता, थानाधिकारी को हटाने के संकेत: मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी
चारणवासी। गांव फेफाना निवासी विनोद भादू पर 4 मार्च को हुए जानलेवा हमले के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर पहुंचे पूर्व विधायक अभिषेक मटोरिया और पूर्व पंचायत समिति सदस्य रमेश बेनिवाल ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने बताया कि हमले का कथित मास्टरमाइंड नवीन उर्फ लीलू घटना के पांच दिन बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में शराब माफियाओं ने पंजाब और हरियाणा के हिस्ट्रीशीटरों व भगोड़ों को बुलाकर गैंग बना रखी है, जो काले शीशे लगी गाड़ियों में अवैध हथियारों के साथ खुलेआम घूमते हैं, जिससे गांव में दहशत का माहौल है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्तमान थानाधिकारी कैलाशचंद्र के आने के बाद पिछले चार महीनों में अपराधियों के हौसले बढ़ गए हैं और गांव में अवैध शराब की बिक्री बढ़ी है। साथ ही थाने में वर्षों से जमे कुछ सिपाहियों पर शराब माफिया और थानाधिकारी के बीच सांठगांठ कराने का भी आरोप लगाया गया। ग्रामीणों ने मामले की जांच पूर्व थानाधिकारी एसआई नरेंद्र सहू को सौंपने की मांग की।पूर्व विधायक अभिषेक मटोरिया ने पुलिस अधीक्षक हरी शंकर से वार्ता कर थानाधिकारी को बदलने, जांच एसआई नरेंद्र सहू को सौंपने और शेष आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही फेफाना में स्वीकृत एक ही ठेके पर शराब बिक्री सुनिश्चित करने, थाने में लंबे समय से तैनात सिपाहियों का तबादला करने तथा काले शीशे लगी गाड़ियों व अवैध हथियार रखने वालों पर कार्रवाई की भी मांग रखी। एसपी ने मामले की जांच नरेंद्र सहू को देने, दोषी सिपाहियों को चिह्नित कर जल्द बदलने और आबकारी विभाग के हस्तक्षेप से एक स्थान पर शराब बिक्री व्यवस्था सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी तक धरना जारी रखने की बात कही।
21 नामजद सहित 125 प्रदर्शनकारियों पर केस
5 मार्च को आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर किए गए सड़क जाम के मामले में पुलिस ने अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष मंगेज चौधरी सहित 21 नामजद और करीब 100-125 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एएसआई महेंद्र सिंह की रिपोर्ट पर बीएनएस की धारा 285, 223(बी), 189(2) और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच सीआई कैलाशचंद्र को सौंपी गई है।
