हनुमानगढ़। भवन निर्माण मिस्त्री–मजदूर एकता यूनियन (सीटू) के बैनर तले गुरुवार को सैकड़ों श्रमिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शहर में रोष मार्च निकाला और श्रम विभाग कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम श्रम कल्याण समझौता अधिकारी के माध्यम से विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन में निर्माण कार्य से जुड़े मिस्त्री, मजदूर, प्लंबर, पीओपी कारीगर, कारपेंटर, टाइल्स व मार्बल मिस्त्री सहित लोडिंग-अनलोडिंग का कार्य करने वाले बड़ी संख्या में श्रमिक शामिल हुए।यूनियन के जिला अध्यक्ष कामरेड शेर सिंह शाक्य ने बताया कि लंबे समय से श्रमिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि शुभ लक्ष्मी और शुभ शक्ति योजना की लाखों फाइलें स्वीकृत होने के बावजूद लंबित पड़ी हैं, जबकि श्रमिकों के बच्चों की छात्रवृत्ति भी वर्षों से बकाया है। मजदूर कार्ड के नवीनीकरण और नए पंजीयन की प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं खड़ी की जा रही हैं। कई स्थानों पर मालिकों के आधार कार्ड की मांग की जा रही है, जो व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। निर्माण यूनियन के जिला सचिव कामरेड बहादुर सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि कार्यस्थलों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण कई मजदूर दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं।

कई मामलों में मौतें भी हुईं, लेकिन प्रभावित परिवारों को न तो मुआवजा मिला और न ही किसी प्रकार की सहायता दी गई। उन्होंने ई-मित्र केंद्रों पर योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर अवैध वसूली किए जाने की भी शिकायत की। साथ ही पिछले चार वर्षों से मजदूरी में बढ़ोतरी नहीं होने से श्रमिकों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। ज्ञापन में कॉमरेड बसंत सिंह, सुल्तान खान और बलदेव मक्कासर ने बताया कि निर्माण सामग्री की लोडिंग-अनलोडिंग करने वाले श्रमिकों को भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण मंडल के तहत पंजीकृत नहीं किया जा रहा है, जिससे वे मंडल की विभिन्न योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। यूनियन ने मांग की कि ऐसे श्रमिकों को तुरंत पंजीयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए। सीटू यूनियन ने अपने 17 सूत्रीय मांगपत्र में श्रम मंत्री की शीघ्र नियुक्ति, प्रत्येक जिले में पर्याप्त श्रम अधिकारियों की तैनाती, लंबित एफडीआर भुगतान एक वर्ष के भीतर जारी करने, छात्रवृत्ति व प्रसूति सहायता एकमुश्त देने तथा औजार खरीद सहायता राशि 2 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने की मांग रखी। इसके अलावा 60 वर्ष की आयु पूरी करने वाले श्रमिकों के लिए 5 हजार रुपये मासिक पेंशन लागू करने, सेस वसूली को नियमित करने और श्रमिकों के खातों में सीधे भुगतान सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
