– श्रावण मास का बताया आध्यात्मिक महत्व, कम बारिश पर बोले-पेड़ों की कटाई और पर्यावरण असंतुलन भी बड़ा कारण
हनुमानगढ़। श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन और पुण्यदायी समय है। इस माह श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव का पूजन, जलाभिषेक, बिल्व पत्र अर्पण, मंत्र जाप और व्रत करने से प्रारब्ध कर्मों का क्षय होता है तथा व्यक्ति को सुख, शांति और अंततः मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। यह बात पंडित रतनलाल शास्त्री ने श्रावण मास के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कही। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म में प्रत्येक माह का अपना विशेष महत्व है। भगवान विष्णु के लिए मार्गशीर्ष और कार्तिक मास विशेष माने गए हैं, जबकि भगवान शिव के लिए श्रावण और फाल्गुन का महीना अत्यंत पवित्र है। श्रावण मास समस्त जीव-जंतुओं और मानव मात्र के कल्याण का महीना है, जिसमें भगवान शिव अपने भक्तों को सहज रूप से कृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करते हैं। पंडित शास्त्री ने कहा कि श्रावण में किसी भी दिन श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का दर्शन, जलाभिषेक, पुष्प और बिल्व पत्र अर्पित करना, मंत्रों का जाप करना तथा उपवास रखना अत्यंत फलदायी माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई श्रद्धालु श्रावण का केवल एक सोमवार भी विधि-विधान से पूजन कर ले, तो उसका भी विशेष महत्व है, जबकि चारों सोमवार का व्रत और पूजन अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। विशेष रूप से पुरुष यदि सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव को जल और बिल्व पत्र अर्पित करें तो उन्हें धर्म, अर्थ और काम—तीनों प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।
बारिश की कमी पर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
हनुमानगढ़ में कम बारिश के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर पंडित रतनलाल शास्त्री ने कहा कि इसके पीछे आध्यात्मिक कारणों के साथ-साथ पर्यावरणीय असंतुलन भी प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि एक ओर कहीं अतिवृष्टि हो रही है तो दूसरी ओर कई क्षेत्रों में वर्षा नहीं हो रही। इसका बड़ा कारण लगातार पेड़ों की कटाई और पर्यावरण में बढ़ता असंतुलन है। उन्होंने कहा कि किसान भी अब अपने खेतों में पेड़ नहीं रखना चाहते, जिससे खेजड़ी जैसे उपयोगी वृक्ष तेजी से समाप्त होते जा रहे हैं। वृक्षों की संख्या घटने का सीधा असर वर्षा चक्र पर पड़ रहा है। उन्होंने सभी लोगों से वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी बताया कारण
पंडित शास्त्री ने कहा कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी वर्षा का संबंध ग्रहों की स्थिति से माना जाता है। उनके अनुसार शुष्क क्षेत्रों में जब सूर्य, शुक्र से आगे रहता है तो खंड वर्षा की स्थिति बनती है, जिसके कारण कहीं अच्छी बारिश होती है तो कहीं वर्षा नहीं के बराबर होती है।
