पीलीबंगा। शिक्षा के क्षेत्र में सतत नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए पहचाने जाने वाले श्री खुशालदास विश्वविद्यालय के विशेष शिक्षा विभाग द्वारा दिव्यांगता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन पीलीबंगा के वार्ड नंबर 27 स्थित सरस्वती पब्लिक शिक्षा समिति परिसर में किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में दिव्यांगजनों के प्रति समानता, संवेदनशीलता तथा समावेशन की भावना को सुदृढ़ करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि दिव्यांगता किसी की कमजोरी नहीं, बल्कि एक अलग क्षमता है, जिसे समझने और स्वीकार करने की आवश्यकता है। आयोजन में शिक्षा, समाजसेवा और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को गरिमा और प्रभावशीलता प्रदान की।
अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी राम प्रसाद तथा समाजसेवी एवं नगर पार्षद विक्रम उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षक विक्की वर्मा ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विशेष शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सत्यनारायण ने की। इसके अतिरिक्त श्री खुशालदास विशेष विद्यालय के प्राचार्य पुरुषोत्तम सोलंकी तथा श्री गुरु गोबिन्द सिंह चेरीटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा भी मंचासीन रहे।

दिव्यांगता को बताया “नौवीं शक्ति” मुख्य अतिथि राम प्रसाद ने अपने संबोधन में दिव्यांगता को “नौवीं शक्ति” की संज्ञा देते हुए कहा कि दिव्यांगजन समाज की विशेष शक्ति हैं, जिन्हें सहानुभूति नहीं बल्कि समान अवसरों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी दिव्यांग व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
जागरूकता कार्यक्रम सामाजिक परिवर्तन की नींव
श्री गुरु गोबिन्द सिंह चेरीटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होते हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए जहाँ वे सम्मान, आत्मविश्वास और अवसरों के साथ जीवन यापन कर सकें। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे दिव्यांगजनों को सहयोग देकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी भूमिका निभाएं।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
कार्यक्रम के दौरान विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों द्वारा नुक्कड़ नाटक, नृत्य, संगीत एवं गायन जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दिव्यांगजनों के जीवन संघर्ष, उनकी क्षमताओं और समाज के दायित्वों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावुक कर दिया और तालियों की गूंज से कार्यक्रम स्थल गूंज उठा। दर्शकों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा, अभिभावकों को जागरूक करने का माध्यम कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. सत्यनारायण ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल समाज को जागरूक करते हैं, बल्कि अभिभावकों को भी सशक्त बनाने का कार्य करते हैं।
सोच बदलने की आवश्यकता
नगर पार्षद विक्रम ने अपने वक्तव्य में कहा कि दिव्यांग बच्चों की क्षमताओं को पहचानना और उन्हें प्रोत्साहित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विभागीय स्टाफ एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम में विशेष शिक्षा विभाग की ओर से दीपिका द्विवेदी, अनमोल शर्मा, मनीष कुमार, विकास सहित विशेष विद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं एवं गतिविधियों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम के अंत में प्रदीप चौहान ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से ही इस प्रकार के कार्यक्रम सफल होते हैं और यही सहयोग समावेशी समाज के निर्माण की आधारशिला है।
निष्कर्ष
दिव्यांगता जागरूकता कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि शिक्षा, समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें, तो दिव्यांगजन भी सम्मान और समान अवसरों के साथ जीवन जी सकते हैं। श्री खुशालदास विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक आयोजन था, बल्कि समाज की सोच बदलने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हुआ।
