हनुमानगढ़। भारतीय ट्रेड यूनियन केन्द्र (सीटू) की ओर से मंगलवार को देशव्यापी आह्वान पर टाउन की अनाज मंडी में मांग दिवस मनाया गया। इस दौरान मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शन करते हुए केन्द्र सरकार की ओर से लागू किए गए चार लेबर कोड की प्रतियां जलाकर विरोध जताया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार ने मजदूरों के हितों की रक्षा करने वाले 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर उनकी जगह चार लेबर कोड लागू किए हैं, जिनमें मजदूरों के पक्ष में कोई प्रावधान नहीं है। सीटू नेता आत्मासिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर मजदूरों के अधिकारों पर कुठाराघात किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में गेहूं खरीद व्यवस्था के कारण किसान भी परेशान हैं और मजदूरों को भी रोजगार संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जंक्शन और टाउन धानमंडी में एफसीआई की ओर से लगभग 29 लाख कट्टों की खरीद की गई थी, लेकिन इस बार सरकारी खरीद देर से शुरू हुई है और खरीद की अंतिम तिथि 31 मई तय की गई है। उनका कहना था कि इतनी कम अवधि में सभी किसान अपनी उपज नहीं बेच पाएंगे। आत्मासिंह ने कहा कि किसान और व्यापारी लगातार गेहूं खरीद की समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही गोदाम नहीं खोले जा रहे और बारदाने की भी भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि खरीद अवधि नहीं बढ़ाई गई तो दोनों जिलों के किसान सड़कों पर उतरकर अधिकारियों के कार्यालयों का घेराव करेंगे। इस दौरान बहादुर सिंह चौहान ने कहा कि मजदूरों ने आजादी से पहले लंबे संघर्ष के बाद आठ घंटे काम, यूनियन बनाने का अधिकार और सामाजिक सुरक्षा जैसे अधिकार हासिल किए थे, लेकिन वर्तमान सरकार ने मजदूरों के ये अधिकार कमजोर कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक 44 श्रम कानूनों को पुन: लागू नहीं किया जाता और चारों लेबर कोड वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
