– श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय में उन्नत गेहूं बीज वितरण कृषक मेला आयोजित- कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं-सरसों की किस्मों, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों की दी जानकारी
हनुमानगढ़। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीजों और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देकर फसल उत्पादन एवं आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय में बुधवार को उन्नत गेहूं बीज वितरण कृषक मेले का आयोजन किया गया। श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा के नेतृत्व में आयोजित एक दिवसीय मेले में कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं और सरसों की उन्नत किस्मों, गुणवत्तापूर्ण बीजों के चयन, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के बारे में किसानों को जानकारी दी। श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि विश्वविद्यालय का कार्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं है, बल्कि किसानों और आमजन को लाभ पहुंचाने के साथ उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए प्रयास करना भी संस्थान की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय समय-समय पर ऐसे आयोजन करता है, जिनसे किसानों को कृषि विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिल सके। किसान नई तकनीकों को अपनाकर अपनी उपज और आय में वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीजों के चयन और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। मुख्य वक्ता एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामावतार मीणा ने कहा कि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में बीज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। किसानों को बीज खरीदते समय उसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ग्रामीण विकास के तहत नई कार्यशालाओं का आयोजन करेगा। कृषि कार्यांे में ईमानदारी, शुद्धता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने किसानों के हित में विश्वविद्यालय की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ज्ञान के केन्द्र के रूप में विकसित हो रहा है।
क्षेत्र और खेत के अनुसार करें किस्मों का चयन
हनुमानगढ़ के पूर्व उपनिदेशक कृषि विस्तार डॉ. जयनारायण बेनीवाल ने कहा कि गेहूं और सरसों की अनेक किस्में उपलब्ध हैं, लेकिन किसानों को अपने क्षेत्र और खेत की परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन करना चाहिए। इसके लिए अनुभवी कृषि विशेषज्ञों का मार्गदर्शन लेना और गुणवत्तापूर्ण बीजों का इस्तेमाल करना जरूरी है। उन्होंने विश्वविद्यालय में अनुभवी अधिकारियों के मार्गदर्शन में बीज उत्पादन इकाई स्थापित करने का सुझाव भी दिया, ताकि किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध करवाने की दिशा में काम किया जा सके।
संतुलित उर्वरक उपयोग से सुधरेगी फसल की गुणवत्ता
श्रीगंगानगर कृषि अनुसंधान केन्द्र के सहायक प्रोफेसर डॉ. लोकेश जैन ने कहा कि अच्छा बीज बेहतर उत्पादन का आधार है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध करवाने के विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। साथ ही किसानों को मिट्टी और फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने डीएपी के साथ एसएसपी के उचित उपयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतुलित पोषण से फसल की गुणवत्ता और उपज में सुधार किया जा सकता है।
बदलते मौसम में आधुनिक तकनीक अपनाना जरूरी
सेवानिवृत्त आईजी गिरीश चावला ने कहा कि हरित क्रांति के बाद भारत ने गेहूं उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की और वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई। हालांकि, पिछले कुछ वर्षांे में मौसम में बदलाव और बढ़ती गर्मी से विभिन्न फसलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। ऐसी परिस्थितियों में उन्नत बीजों, आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाना जरूरी है। किसानों को खेती में नवाचार करते हुए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि ऐसे मेले किसानों को नई जानकारी देने और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान तलाशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नकली बीज और खाद की समस्या पर जताई चिंता
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रेशम सिंह मानुका ने कहा कि विश्वविद्यालय ने किसानों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध करवाया है। उन्होंने कहा कि नकली बीज और खाद जैसी समस्याओं के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे आयोजनों से किसान अपनी समस्याएं विशेषज्ञों के सामने रख सकते हैं और उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। सुभाष मक्कासर ने कहा कि विश्वविद्यालय के माध्यम से किसानों को खेती से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों के साथ संवाद करने का अवसर मिला है। मेले में बाहर से आए कृषि वैज्ञानिकों से मिली जानकारी किसान अपने खेतों में बेहतर उत्पादन के लिए उपयोग कर सकते हैं। कार्यक्रम में डॉ. विजय प्रकाश, डीन एवं कृषि संकाय अध्यक्ष, सुभाष मक्कासर, अश्वनी नारंग, रामचंद बाघला तथा भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष जाकिर हुसैन सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। मेले के आयोजन में डॉ. मंगला राम बजिया, डॉ. राकेश, डॉ. अंकित, विष्णु मूंड, अमृतपाल, सुखवीर सिंह सहित विश्वविद्यालय के अन्य सदस्यों ने सहयोग किया। मंच संचालन मदनलाल शर्मा ने किया।
