चारणवासी। भागवत कथा का श्रवण केवल मनोरंजन या भावनात्मक सुख तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीव को जन्म–मरण के चक्र से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाने वाला साक्षात साधन है। यह उद्गार डेरा बाबा सरसाईनाथ नगरी, सिरसा से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक कृष्णानंद महाराज ने व्यक्त किए। वे गांव रतनपुरा स्थित श्रीकृष्ण गोशाला के प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान गुरुवार को श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे कथा के दौरान महाराज ने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के गूढ़ रहस्यों को सरल एवं मार्मिक भाषा में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर पाप और अत्याचार की सीमा पार हुई है, तब-तब भगवान ने अवतार लेकर धर्म की स्थापना की है। इसी क्रम में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। महाराज ने बताया कि कैसे मथुरा के कारागार में वसुदेव और देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण का रूप धारण किया। कथा में वर्णन किया गया कि जन्म के तुरंत बाद कारागार के द्वार चमत्कारिक रूप से खुल गए, पहरेदार गहरी निद्रा में चले गए और वसुदेव बालकृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार गोकुल ले गए। वहां नंद बाबा और माता यशोदा ने उनका पालन-पोषण किया। कंस के वध की पृष्ठभूमि बताते हुए महाराज ने योगमाया के प्राकट्य का भी उल्लेख किया, जिसे कंस आकाश में पटकने के बावजूद नष्ट नहीं कर सका। इन प्रसंगों को सुनकर पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए और कई की आंखें नम हो गईं। श्रीराम और फिर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग जैसे ही सुनाया गया, पूरा पांडाल “जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। कथा को और भी जीवंत बनाते हुए वासुदेव जी के स्वरूप में कलाकार बालक कान्हा को टोकरी में लेकर पांडाल के बीच से गुजरे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की और वातावरण गोकुलधाम जैसा प्रतीत होने लगा। महिला श्रद्धालुओं ने पारंपरिक मंगलगीत गाकर भगवान का स्वागत किया। आनंद और उल्लास के इस वातावरण में श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान–पुण्य भी किया।

भजनों पर झूमे श्रद्धालु
धार्मिक उत्सव का उत्साह उस समय और बढ़ गया जब प्रख्यात भजन गायक पीके परवाना और रमन ने अपनी मधुर वाणी से भजनों की प्रस्तुति दी। “जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गई”, “नंद के घर भयों”, “जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी”, “छोटा सा कन्हैया मेरा, छोटी सी गैया” और “बधाई हो बधाई, गोकुल में बजे बधाई” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते नजर आए। पूरे पांडाल में भक्तिमय वातावरण व्याप्त हो गया।
सुखी जीवन और मोक्ष का मार्ग बताया
कथा के समापन की ओर महाराज ने अपनी अमृतमयी वाणी से सांसारिक जीवन की उलझनों के बीच आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने के सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति ईश्वर के चरणों में अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है, उसके जीवन के समस्त दुःख स्वतः समाप्त हो जाते हैं। भागवत कथा मन को निर्मल करती है और आत्मा को परम शांति प्रदान करती है। उन्होंने पुनः दोहराया कि भागवत कथा का श्रवण केवल कानों का सुख नहीं, बल्कि यह मानव जीवन को सार्थक बनाते हुए मोक्ष की दिशा में अग्रसर करने वाला दिव्य मार्ग है। कथा के सफल आयोजन पर आयोजकों और ग्रामवासियों ने संतोष व्यक्त किया और श्रद्धालुओं ने भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की कामना की।
