-ऑयल इंडिया ने हनुमानगढ़ में पोटाश अन्वेषण की शुरुआत की
हनुमानगढ़। महारत्न ऑयल इंडिया लिमिटेड सार्वजनिक उपक्रम ने देश में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए स्वतंत्रता के बाद पहली बार कॉरपोरेट इकाई के रूप में कंपोजिट लाइसेंस के तहत पोटाश के वैज्ञानिक अन्वेषण की शुरुआत की है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित जोड़कियाँ-सतीपुरा-खुंजा अमलगमेटेड पोटाश एवं हैलाइट ब्लॉक में अन्वेषण की शुरुआत की गई है। पोटाश देश के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उर्वरक खनिज है।

घरेलू स्तर पर पोटाश संसाधनों की खोज एवं विकास की दिशा में यह पहल आयात पर निर्भरता कम करने तथा देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
16.99 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में होगा वैज्ञानिक अन्वेषण
केंद्र सरकार की प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से ऑयल इंडिया ने हनुमानगढ़ जिले में 16.99 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस पोटाश एवं हैलाइट ब्लॉक का कंपोजिट लाइसेंस प्राप्त किया है। कंपनी द्वारा यहां वैज्ञानिक एवं बहुविषयक अन्वेषण कार्य किया जाएगा।
अन्वेषण के दौरान भूमिगत पोटाश भंडार की विस्तृत मैपिंग के साथ उसके 3डी स्वरूप एवं विस्तार का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इसके लिए यूएनएफसी फ्रेमवर्क के तहत G2 स्तर का अन्वेषण किया जाएगा। साथ ही हाइड्रोजियोलॉजिकल और जियोटेक्निकल अध्ययन भी किए जाएंगे।
‘पोटाश हमारी भूख को मिटा सकती है’
पोटाश को कृषि उत्पादन एवं खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण खनिज बताते हुए ऑयल इंडिया की इस पहल की टैगलाइन “पोटाश हमारी भूख को मिटा सकती है” रखी गई है। घरेलू पोटाश संसाधनों की पहचान एवं विकास से देश की उर्वरक आवश्यकताओं को पूरा करने में दीर्घकालिक सहयोग मिलने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में रणनीतिक विस्तार
ऑयल इंडिया ने तेल एवं गैस क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए देश के रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार किया है। कंपनी ने पोटाश के अलावा ग्रेफाइट एवं वैनेडियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।

कंपनी के अनुसार महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में प्रवेश की रणनीतिक पहल सीएमडी डॉ. रंजीत रथ, डायरेक्टर (एक्सप्लोरेशन एंड डेवलपमेंट) श्री सलोमा योमडो द्वारा की गई है।
