हनुमानगढ़। भारत की जनवादी नौजवान सभा (डीवाईएफआई) की जिला कमेटी ने नीट (यूजी) 2026 परीक्षा मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा गया। डीवाईएफआई सदस्यों ने बताया कि नीट (यूजी) देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है। हर साल लाखों विद्यार्थी डॉक्टर बनने का सपना लेकर इसमें शामिल होते हैं। छात्र वर्षों तक कड़ी मेहनत से तैयारी करते हैं, कई तो अपने घर-परिवार से दूर बड़े शहरों में रहकर कोचिंग लेते हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2024 की नीट परीक्षा को लेकर भी विवाद सामने आया था, और अब वर्ष 2026 की परीक्षा के संबंध में भी पेपर लीक की चर्चाएं हो रही हैं। इससे लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। डीवाईएफआई ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में निजी संस्थानों और कोचिंग माफिया का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होने के कारण इस प्रकार की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। राजस्थान के कोटा, जयपुर और सीकर जैसे कोचिंग हब का उल्लेख करते हुए संगठन ने कहा कि यहां विद्यार्थी भारी आर्थिक बोझ उठाकर तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। डीवाईएफआई ने मांग की है कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट (यूजी) परीक्षा के पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। संगठन सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो डीवाईएफआई देशभर में आंदोलन करेगी। इस अवसर पर वेद मक्कासर, देवीलाल धोलीपाल, सुरेश जोडकिया, हिम्मत सिंह, विकास, सहदेव, गोस्वामी, मंगा सिंह, संदीप कुमार, कृष्ण लाल और अमन सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
