– फैक्ट्रियों की लापरवाही पर उठे सवाल, प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई पर भी नाराजगी
हनुमानगढ़। जंक्शन शहर के रीको औद्योगिक क्षेत्र से निकल रहा गंदा पानी अब धीरे-धीरे गंभीर जनसमस्या का रूप लेता जा रहा है। हालात यह हैं कि सिविल लाइंस जैसी पॉश कॉलोनी सहित आसपास के कई क्षेत्रों में बदबू का आलम बना हुआ है और लोग दूषित वातावरण में रहने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं किया जा रहा, जिससे लोगों में भारी रोष व्याप्त है। क्षेत्र के लोगों के अनुसार, रीको एरिया में संचालित फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी नालियों के माध्यम से कॉलोनियों और खाली प्लॉटों में छोड़ा जा रहा है। इससे पूरे इलाके में तीव्र दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों की संख्या भी बढ़ रही है, जिससे बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। खासतौर पर बाइपास मार्ग और सिविल लाइंस क्षेत्र में स्थिति अधिक खराब बताई जा रही है। लोक जनशक्ति पार्टी के जिलाध्यक्ष विकास झोरड़ ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि फैक्ट्री संचालकों की लापरवाही के कारण आमजन को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग इस मामले में गंभीर नहीं है और कुंभकर्णी नींद सो रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गंदे पानी के कारण क्षेत्र में लगे पेड़-पौधे नष्ट हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सिविल लाइंस कॉलोनी में जिला एवं सेशन न्यायाधीश, जिला कलक्टर सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी आवास स्थित हैं। ऐसे में यदि इस क्षेत्र की यह स्थिति है तो अन्य इलाकों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने जिला कलक्ट्रेट के बाहर शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव का मुद्दा भी उठाया। वहीं, रीको के क्षेत्रीय प्रबंधक अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गंदे पानी की निकासी के लिए मड पंप का संचालन नियमित रूप से किया जाता है और पानी को सेकेंड फेज के पास बने गड्ढे में डाला जाता है। हालांकि, गड्ढा भर जाने पर कुछ नालियों का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर आ जाता है। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री संचालकों को समय-समय पर ईटीपी का सुचारू संचालन करने के निर्देश दिए जाते हैं, ताकि केवल ट्रीट किया हुआ पानी ही बाहर छोड़ा जाए। हालांकि, इसकी निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की है।
5.25 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत
रीको प्रबंधन के अनुसार, आधारभूत ढांचे के विकास के लिए कार्य जारी हैं। गत वर्ष करीब 60 लाख रुपए की लागत से कुछ नालियों का निर्माण किया गया था, जबकि शेष कार्य के लिए करीब 5.25 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हो चुका है। आगामी वित्तीय वर्ष में इस बजट से बाकी नालियों का निर्माण कराया जाएगा, जिससे गंदे पानी के ओवरफ्लो की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। उधर, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि अब तक 7 फैक्ट्री संचालकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। यदि अन्य फैक्ट्रियों की ओर से भी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि समस्या का जल्द स्थायी समाधान किया जाए, अन्यथा वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
