हनुमानगढ़। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के विशेष शिक्षा विभाग की ओर से विशेष शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि विशेष शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए कक्षा-कक्ष में प्राप्त ज्ञान के साथ वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव भी महत्वपूर्ण है। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सामाजिक सहभागिता, संचार क्षमता और स्वतंत्र रूप से कार्य करने की भावना विकसित करते हैं। विश्वविद्यालय के एमडी दिनेश कुमार जुनेजा ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ना भी आवश्यक है। विशेष शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए ऐसे भ्रमण व्यक्तित्व विकास के साथ सामाजिक एवं व्यवहारिक कौशल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ विशेष शिक्षा विभाग के अधिष्ठाता डॉ. सत्यनारायण, प्रो. डॉ. विक्रम सिंह औलख, डीन छात्र कल्याण तथा विभागाध्यक्ष डॉ. मदनलाल बेनीवाल ने बस को हरी झंडी दिखाकर किया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने नवज्योति विशेष विद्यालय का दौरा किया। यहां उन्हें विशेष विद्यालय के वातावरण, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक एवं सहायक व्यवस्थाओं तथा विशेष शिक्षा के व्यावहारिक पक्षों को समझने का अवसर मिला। इसके बाद विद्यार्थियों ने गुरुद्वारे का भ्रमण किया। यहां उन्हें सामाजिक एवं सामुदायिक सहभागिता, अनुशासन, सेवा एवं समावेशी सामाजिक व्यवहार का प्रत्यक्ष अनुभव मिला। विद्यार्थियों को ऐतिहासिक भटनेर किले का भी भ्रमण कराया गया। विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक विरासत को प्रत्यक्ष रूप से देखा तथा उसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी प्राप्त की।
सांकेतिक भाषा के महत्व से हुए परिचित
साइन लैंग्वेज वीक के अंतर्गत भ्रमण के दौरान सांकेतिक भाषा से संबंधित विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की गईं। विद्यार्थियों को सांकेतिक भाषा के महत्व, संचार में इसकी भूमिका और दैनिक जीवन में इसके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने समझा कि सांकेतिक भाषा विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों के साथ प्रभावी एवं सम्मानजनक संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। भ्रमण को केवल सामान्य शैक्षणिक यात्रा तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों के प्रायोगिक जीवन एवं जीवन कौशल से जोड़ा गया। विद्यार्थियों को समूह में कार्य करने, सामाजिक व्यवहार, संचार, अनुशासन, अवलोकन, आत्मनिर्भरता और वास्तविक परिस्थितियों में सीखने का अवसर मिला। भ्रमण में विशेष शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों के साथ विभाग के स्टाफ सदस्य भी शामिल रहे। आयोजन एवं समन्वय में डॉ. दीपिका द्विवेदी की मुख्य भूमिका रही। उनके साथ संदीप कुमार, विकास कुमार एवं ज्योति मिश्रा ने भी सक्रिय सहयोग किया।
