– रेंज पुनर्गठन, स्टाफ बढ़ाने और वेतन विसंगतियां दूर करने की भी उठी आवाज
हनुमानगढ़। संयुक्त वन कर्मचारी संघ, राजस्थान की ओर से वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के निराकरण एवं विभागीय व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर गुरुवार को मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को 11 सूत्री मांग-पत्र सौंपा गया। जिलाध्यक्ष हरप्रीत सिंह के नेतृत्व में सौंपे ज्ञापन में शहीद प्रताप सिंह चुडावत को शहीद का दर्जा देने सहित वन कर्मचारियों की सुरक्षा, सुविधाओं और पदों से जुड़ी विभिन्न मांगें उठाई गईं। संघ ने मांग की कि प्रताप सिंह चुडावत को शहीद का दर्जा देते हुए राज्य सरकार की ओर से 3 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। उनके आश्रित परिवार को राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत विशेष पारिवारिक पेंशन सहित अन्य सभी देय लाभ दिए जाएं तथा अन्य शहीद वन कर्मचारियों के लिए भी स्पष्ट एवं पारदर्शी नीति लागू की जाए। ज्ञापन में वन एवं वन्यजीव सुरक्षा के लिए स्पष्ट एवं व्यावहारिक एसओपी जारी करने की मांग की गई।

साथ ही वर्तमान कार्यभार, वन क्षेत्रफल, वन्यजीव क्षेत्र, कार्यालयों की संख्या एवं बढ़े हुए विभागीय दायित्वों के आधार पर सभी संवर्गांे की कैडर स्ट्रेंथ का पुनर्गठन कर आवश्यक पद स्वीकृत करने, फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों को यात्रा, फील्ड ड्यूटी, जोखिम एवं अन्य देय सुविधाएं और भत्ते उपलब्ध करवाने, पुलिस थानों की तर्ज पर वन रेंजों का वैज्ञानिक एवं प्रशासनिक आधार पर पुनर्गठन करने तथा जरूरत के अनुसार नई रेंज गठित कर रेंजर, डिप्टी रेंजर, वनपाल, वनरक्षक, मंत्रालयिक कर्मचारी, वाहन चालक एवं अन्य आवश्यक स्टाफ के पद स्वीकृत करने की मांग रखी गई। इसके अलावा सभी संवर्गांे के वेतनमान, ग्रेड-पे एवं वेतन निर्धारण संबंधी विसंगतियां दूर करने तथा कर्तव्य के दौरान वीरगति प्राप्त शहीद वन कर्मचारियों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनके जन्मस्थान, कार्यक्षेत्र या शहादत स्थल पर स्थित उपयुक्त वन विभाग की पार्क, नर्सरी, वाटिका, कार्यालय, वन विश्राम गृह अथवा प्रशिक्षण केन्द्र का नामकरण उनके नाम पर करने की मांग की गई। संघ ने सभी मांगों के निस्तारण के लिए कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक आयोजित करने तथा उसमें वित्त, कार्मिक एवं सामान्य प्रशासन विभाग को शामिल कर बिंदुवार निर्णय लेने की मांग की। संघ ने कहा कि वन कर्मचारी कठिन एवं जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में अपने दायित्व निभा रहे हैं, इसलिए उनकी मांगों पर प्राथमिकता से कार्रवाई की जानी चाहिए। मांगों का समयबद्ध समाधान नहीं होने पर संयुक्त वन कर्मचारी संघ ने आंदोलन की चेतावनी दी।
