सतना। सोमवार को जिला पंचायत के सामान्य सम्मेलन की बैठक उस समय हंगामेदार हो गई, जब कई सदस्यों ने विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप लगाते हुए सदन के भीतर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष रामखेलावन कोल कर रहे थे। शुरुआत में सामान्य रूप से चल रही बैठक अचानक तनावपूर्ण माहौल में बदल गई। प्रदर्शन कर रहे सदस्यों का आरोप था कि सत्ता पक्ष से जुड़े जनप्रतिनिधियों के वार्डों में विकास कार्यों के लिए अधिक धनराशि आवंटित की जा रही है, जबकि विपक्षी सदस्यों के क्षेत्रों की लगातार अनदेखी हो रही है। उनका कहना था कि इस असंतुलित नीति के कारण कई गांवों में बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़क, पानी और स्वच्छता प्रभावित हो रही हैं, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सदस्य प्रतिनिधि रितेश त्रिपाठी ने बैठक के दौरान एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिले के ग्रामीण इलाकों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से एक भी दमकल वाहन की व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही करार देते हुए कहा कि समय रहते संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में बड़े हादसे हो सकते हैं। इस विरोध प्रदर्शन में सदस्य जान्हवी यादव, सावित्री त्रिपाठी, विमला देवी और एकता सिंह सहित अन्य प्रतिनिधि भी शामिल रहे। सभी सदस्यों ने एकजुट होकर विकास कार्यों में पारदर्शिता और सभी वार्डों के साथ समान व्यवहार की मांग की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भेदभावपूर्ण रवैया बंद नहीं किया गया तो उनका विरोध आगे भी जारी रहेगा। बैठक के दौरान स्थिति कुछ समय के लिए बेहद तनावपूर्ण हो गई, जिससे कार्यवाही बाधित रही। हालांकि, बाद में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) शैलेन्द्र सिंह ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला। उन्होंने नाराज सदस्यों से चर्चा की, उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना और निष्पक्ष जांच व उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। सीईओ के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारी सदस्य शांत हुए और बैठक की कार्यवाही पुनः शुरू हो सकी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने जिला पंचायत की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों में संतुलन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में सभी क्षेत्रों में समान विकास सुनिश्चित हो पाता है या नहीं।
