हनुमानगढ़। टाउन के सूर्यनगर क्षेत्र स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नम्बर तीन में बुधवार को एक सराहनीय सामाजिक पहल देखने को मिली। क्षेत्र की सामाजिक संस्था सूर्यनगर मित्र मंडली की ओर से विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विद्यालय को 15 मॉडिफाई किए हुए मेज-डेस्क भेंट किए गए। इस पहल से विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर बैठने की व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी। संस्था के प्रधान बेगाराम गुडेसर ने बताया कि विद्यालय में लंबे समय से विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त और व्यवस्थित मेज-डेस्क की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। कई बच्चे पुराने और क्षतिग्रस्त फर्नीचर पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर थे। इसी समस्या को देखते हुए सूर्यनगर मित्र मंडली के सदस्यों ने पुराने मेज-डेस्क को एकत्रित कर उनकी मरम्मत करवाई और उन्हें मॉडिफाई कर पुनः उपयोग योग्य बनाया। इसके बाद इन्हें विद्यालय को भेंट किया गया ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास की सबसे मजबूत नींव होती है और बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना हम सभी का दायित्व है। विद्यालय में मेज-डेस्क की व्यवस्था सुधरने से विद्यार्थियों को आरामदायक माहौल में अध्ययन करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके अध्ययन में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कार्यक्रम के दौरान मित्र मंडली के सदस्यों ने विद्यार्थियों से संवाद भी किया और उन्हें शिक्षा का महत्व समझाते हुए मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो जीवन में आगे बढ़ने और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करने का रास्ता खोलती है। इस अवसर पर संस्था के सदस्य जगदीश प्रसाद शर्मा, लालचंद तरड़, राजाराम पूनिया, विक्रम गोदारा, सुभाष चौहान और संदीप बेनीवाल सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया। मित्र मंडली के सदस्यों ने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी वे विद्यालय और विद्यार्थियों के हित में इसी प्रकार सामाजिक सहयोग करते रहेंगे। उनका कहना था कि शिक्षा के क्षेत्र में किया गया योगदान समाज के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखता है। विद्यालय परिवार ने सूर्यनगर मित्र मंडली का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सहयोग से विद्यालयों में संसाधनों की कमी काफी हद तक दूर की जा सकती है। ऐसे प्रयास न केवल विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करते हैं, बल्कि समाज और विद्यालय के बीच आपसी सहयोग और विश्वास को भी मजबूत बनाते हैं।
