हनुमानगढ़। वैश्विक स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी के अभूतपूर्व विस्तार के डिजिटल दौर ने जहां एक ओर जीवन को आसान बना दिया है वहीं दूसरी ओर साइबर अपराध व साइबर ठगी के एक नए जटिल युग का भी जन्म हुआ है। आज का यह डिजिटल युग अपराध की भौतिक सीमाओं को पार कर चुका है। इसके चलते समाज का प्रत्येक वर्ग खासकर अशिक्षित, महिलाएं एवं बुजुर्ग इस बैंकिंग धोखाधड़ी व साइबर ठगी का शिकार होते हैं। इस बढ़ती हुई चुनौती को देखते हुए नेहरू मैमोरियल विधि महाविद्यालय की ओर से अभिनव पहल की गई है। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीताराम ने बताया कि साइबर ठगों से मुकाबला करने के लिए तथा वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के लिए महाविद्यालय की ओर से नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन एवं स्थानीय साइबर सैल और बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों की ओर से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित होगा। इसके लिए सर्वप्रथम चरणबद्ध तरीके से नि:शुल्क पंजीयन किया जाएगा। उसके पश्चात प्रशिक्षण के दौरान यह बताया जाएगा कि किस प्रकार से साइबर ठग फोन कॉल, फर्जी लिंक, फर्जी एप, केवाईसी अपडेट, बैंक अधिकारी बनकर या पारिवारिक आपात स्थिति का भय दिखाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। वित्तीय सेंधमारी तथा डिजिटल अरेस्ट जैसे कृत्य न केवल व्यक्तिगत क्षति है, बल्कि यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और विधिक तंत्र की संप्रभुता के लिए एक गंभीर चुनौती भी है। प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया जाएगा कि ऐसी आपात स्थिति में तुरन्त क्या करना चाहिए एवं किन बातों की सतर्कता बरतनी चाहिए। पंजीकृत व्यक्तियों को यथाशीघ्र सूचना जारी कर महाविद्यालय के विधिक सेवा केन्द्र में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान मोबाइल फोन के सुरक्षित उपयोग, ओटीपी तथा पिन की गोपनीयता, संदिग्ध कॉल की पहचान, साइबर अपराध की सूचना व प्रक्रिया तथा हेल्पलाइन नम्बर आदि के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी। नि:शुल्क प्रशिक्षण के लिए किसी भी आयु वर्ग के छात्र-छात्राएं, महिलाएं, सीनियर सिटीजन 26 जनवरी तक महाविद्यालय कार्यालय तथा विधिक सहायता सेवा केन्द्र प्रभारी डॉ. बृजेश अग्रवाल से जानकारी प्राप्त कर पंजीकरण करवा सकते हैं।
