हनुमानगढ़। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के बेसिक एवं एप्लाइड साइंस संकाय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 9वीं बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक बुधवार को आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020), आउटकम बेस्ड एजुकेशन तथा यूजीसी की पाठ्यक्रम रूपरेखा के अनुरूप स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का पुनरीक्षण, आधुनिकीकरण एवं उन्हें उद्योगोन्मुख बनाना रहा। बैठक की अध्यक्षता संकाय अधिष्ठाता प्रो. डॉ. स्वाति ओझा ने की। इसमें विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रो. डॉ. गिजाल एफ अंसारी (भौतिकी), डॉ. एके मलिक (गणित), डॉ. अनुश्री आर्या (रसायन विज्ञान), प्रो. डॉ. रामपाल अहरोदिया (वनस्पति विज्ञान), डॉ. पीआर ओझा (प्राणी विज्ञान), डॉ. निधि अग्रवाल (फूड एंड न्यूट्रिशन) तथा उद्योग विशेषज्ञ अपूर्व चौधरी ने हिस्सा लिया। विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. पुष्पेंद्र कुमार, डॉ. मनवीर कौर, डॉ. पायल गुंबर, डॉ. मीनल, डॉ. नीलम मील मौजूद रहे। बैठक में विशेषज्ञों ने विज्ञान शिक्षा को भविष्य की आवश्यकताओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया। उन्होंने पाठ्यक्रमों में नैनो टेक्नोलॉजी, नैनो मैटेरियल्स, एडवांस्ड मैटेरियल्स साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रसायन विज्ञान, कम्प्यूटेशनल केमिस्ट्री, ग्रीन केमिस्ट्री, सतत विकास, ऊर्जा सामग्री, बैटरी प्रौद्योगिकी, हाइड्रोजन ऊर्जा, अनुसंधान पद्धति, वैज्ञानिक लेखन, बौद्धिक संपदा अधिकार, पेटेंट ड्राफ्टिंग, औद्योगिक इंटर्नशिप, शोध परियोजनाएं, उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों का प्रशिक्षण, डेटा विश्लेषण, कौशल विकास पाठ्यक्रम और अंतर्विषयक अध्ययन जैसे विषयों को शामिल करने की अनुशंसा की। श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ कौशल, नवाचार और रोजगारपरक दक्षताओं से सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय समय की मांग के अनुरूप अपने पाठ्यक्रमों को उद्योगोन्मुख बना रहा है, जिससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अवसर प्राप्त होंगे। बैठक में यह भी अनुशंसा की गई कि एनईपी-2020 के अनुरूप सभी पाठ्यक्रमों में स्किल एन्हांसमेंट कोर्स, वैल्यू एडेड कोर्स और जनरल इलेक्टिव कोर्स को प्रभावी रूप से शामिल किया जाए। साथ ही विद्यार्थियों को एनपीटीईएल और स्वयं जैसे राष्ट्रीय ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म से जोड़ने तथा उनके प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों को शैक्षणिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया गया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि बाह्य विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर संशोधित पाठ्यक्रम तैयार कर संबंधित वैधानिक निकायों से अनुमोदन के बाद आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू किए जाएंगे।
