पल्लू। पल्लू तहसील एवं बिसरासर में रविवार को हिंदू सम्मेलन सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में संत विद्यानन्द सरस्वती एवं स्वामी शंकरानन्द मौजूद रहे, जबकि प्रांत प्रचार प्रमुख (प्रचारक) पंकज कुमार मुख्य वक्ता के रूप में सम्मिलित हुए। संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 16 जनवरी से 8 फरवरी के मध्य देशभर में डेढ़ लाख से अधिक हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों का उद्देश्य समाज में जागरण, समरसता और राष्ट्रबोध की भावना को सुदृढ़ करना है। पल्लू एवं बिसरासर में आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ भजन एवं संगीतमय हनुमान चालीसा के साथ हुआ। अपने उद्बोधन में प्रांत प्रचार प्रमुख पंकज कुमार ने कहा कि संगठित हिंदू ही समर्थ भारत का निर्माण कर सकता है, लेकिन यह समझना आवश्यक है कि संगठित हिंदू का वास्तविक स्वरूप क्या है। उन्होंने बताया कि मंदिरों में आरती के पश्चात होने वाला उद्घोष ‘धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो। प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो सनातन धर्म की वैश्विक और व्यापक सोच को दर्शाता है। सनातन धर्म केवल स्वयं या परिवार के नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के कल्याण की कामना करता है, जिसका प्रतीक वसुधैव कुटुंबकम् और सर्वे भवंतु सुखिन: जैसे मंत्र हैं। उन्होंने पंच प्रणों को जीवन में उतारने का आह्वान करते हुए कहा कि जब प्रत्येक हिंदू कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्वदेशी का बोध, नागरिक कर्तव्यों का पालन और पर्यावरण संरक्षण जैसे पंच परिवर्तन को अपने आचरण में शामिल करता है तथा समाज जाति-पाति से ऊपर उठकर एकजुट होता है, तभी संगठित हिंदू का सच्चा स्वरूप सामने आता है। ऐसा संगठित समाज ही समर्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव रख सकता है। सम्मेलन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना एवं राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रबल करते हुए सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का मंच संचालन दलीप भारद्वाज ने किया।
