चारणवासी। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर चारणवासी के खेतों और आसमान में एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां प्रकृति ने स्वयं को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग लिया है। सूर्योदय के समय आसमान में बिखरी केसरिया लाली, सुबह की सफेद ओस और धुंध, और खेतों में लहलहाती हरी फसलों ने मिलकर एक सजीव तिरंगे की आकृति निर्मित कर दी। इस अलौकिक दृश्य को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो गणतंत्र दिवस के भव्य स्वागत के लिए प्रकृति स्वयं आतुर हो और अपनी आभा से ‘गण-तंत्र’ का अभिनंदन कर रही हो। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो जमीन से लेकर आसमान तक पूरी कुदरत गणतंत्र दिवस के स्वागत में झुककर नमन कर रही हो। ग्रामीणों का कहना है कि प्रकृति का यह अनूठा संगम देशभक्ति के जज्बे को और बढ़ा रहा है। यह केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि हमारी माटी का गणतंत्र के प्रति सम्मान है।
