हनुमानगढ़। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की सुचारू खरीद के लिए पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध करवाने की मांग को लेकर शुक्रवार को पीलीबंगा धानमंडी भी बंद रही। धानमंडी के गेट बन्द कर व्यापारियों ने कृषि जिंसों की बोली का कार्य बंद रखकर धरना-प्रदर्शन किया और सरकार व एफसीआई अधिकारियों के खिलाफ रोष जताया। धरने में किसान और मजदूर भी शामिल हुए। व्यापारियों ने बताया कि पीलीबंगा मंडी में बारदाने की भारी कमी बनी हुई है। सरकार की ओर से अब तक करीब 13 लाख कट्टे उपलब्ध करवाए गए हैं, जबकि मंडी को लगभग 24 से 25 लाख कट्टों की आवश्यकता होती है। मंडी परिसर में अभी भी करीब 45 से 50 प्रतिशत गेहूं पड़ा हुआ है। धरने पर बैठे व्यापारियों ने कहा कि इस संबंध में जिला प्रशासन से चार-पांच बार वार्ता की जा चुकी है। प्रशासन ने बारदाना उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन गुरुवार को जारी पत्र में पीलीबंगा मंडी के लिए केवल 50 हजार कट्टे स्वीकृत किए गए, जबकि वर्तमान में मंडी को करीब 10 लाख कट्टों की जरूरत है। व्यापारियों के अनुसार किसानों के पास अभी भी 9 से साढ़े 9 लाख कट्टे गेहूं रखा हुआ है, जिसे वे मंडी में लेकर नहीं आए हैं। अब तक किसानों की ओर से करीब 9 लाख कट्टों गेहूं के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया जा चुका है, जिनमें से लगभग 7 लाख कट्टों का बायोमेट्रिक सत्यापन भी हो चुका है। व्यापारियों ने कहा कि यदि समय पर गेहूं की खरीद नहीं हुई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उनका कहना था कि वर्तमान परिस्थितियों में किसान की गेहूं फसल को 2200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में भी खरीदने वाला नहीं मिलेगा। व्यापारियों ने सरकार और खरीद एजेंसी से मांग की कि पीलीबंगा धानमंडी में पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध करवाया जाए ताकि किसानों की गेहूं फसल की समय पर खरीद और भुगतान सुनिश्चित हो सके। साथ ही रजिस्ट्रेशन करवाने वाले किसानों की फसल खरीद के लिए मंडी को जल्द से जल्द करीब 10 लाख कट्टे उपलब्ध करवाने की मांग भी उठाई गई।
