हनुमानगढ़। सरकार की ओर से अनाज मंडियों में गेहूं की खरीद व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों और निजी कंपनियों को ब्लॉक आवंटित करने के फैसले के विरोध में मजदूर संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। भारतीय ट्रेड यूनियन केन्द्र (सीटू) की जिला कमेटी की बैठक शनिवार को जिलाध्यक्ष आत्मा सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें मजदूर विरोधी निर्णयों के खिलाफ 18 मार्च को जिला कलक्ट्रेट कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। बैठक को संबोधित करते हुए रामेश्वर वर्मा ने कहा कि सरकार अनाज मंडियों में नवाचार के नाम पर हरियाणा और पंजाब पैटर्न लागू करने की बात कहकर सरकारी खरीद में निजी कंपनियों को एफसीआई के बराबर ब्लॉक आवंटित कर रही है। इसके साथ ही गेहूं की हेंडलिंग का काम भी व्यापारियों को सौंपने का निर्णय लिया गया है, जिससे मंडियों में कार्यरत हजारों मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। सीटू जिला महासचिव शेर सिंह शाक्य ने बताया कि जिले की विभिन्न मंडियों में निजी कंपनियों को ब्लॉक आवंटित किए गए हैं। टाउन और जंक्शन की मंडियों में पांच-पांच ब्लॉक, संगरिया, टिब्बी, गोलूवाला, रावतसर और पीलीबंगा मंडियों में तीन-तीन ब्लॉक निजी कंपनियों को दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कंपनियों का उद्देश्य धीरे-धीरे एफसीआई को समाप्त कर मंडी व्यवस्था को कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब में गांव-गांव में किसानों के लिए मंडियां बनी हुई हैं, जबकि राजस्थान में ज्यादातर खरीद शहरी मंडियों में होती है। सरकार की ओर से बनाए गए फोकल प्वाइंट पर न तो पक्के प्लेटफॉर्म हैं और न ही शेड की व्यवस्था, जिसके कारण किसानों की फसल खराब होने का खतरा बना रहता है। यही वजह है कि किसान अपनी उपज लेकर शहरी मंडियों में आते हैं। निजी कंपनियों के आने से व्यापारियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उठाव में और अधिक समय लगेगा। मजदूर नेताओं ने कहा कि हेंडलिंग का काम व्यापारियों को देने से मजदूरों को भारी परेशानी होगी। उन्होंने बताया कि मंडियों में गोदामों में गेहूं के थैलों की स्टैकिंग 22 फीट ऊंचाई तक की जाती है, जो एक तकनीकी कार्य है और इसे केवल प्रशिक्षित मजदूर ही कर सकते हैं। उत्तरी भारत में गेहूं की खरीद एक ही समय पर होती है, इसलिए दूसरे क्षेत्रों से मजदूर बुलाना भी संभव नहीं होता। तुलाई कांटे भी ऑनलाइन होते हैं, जिनकी क्षमता सीमित होती है और एक कांटे से प्रतिदिन लगभग 100 ट्रकों की ही तुलाई हो पाती है। मजदूर नेताओं ने कहा कि इन व्यवस्थागत समस्याओं के बावजूद अक्सर देरी का दोष मजदूरों पर मढ़ दिया जाता है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मजदूर विरोधी निर्णय वापस नहीं लिए तो मंडियों को ठप कर आंदोलन तेज किया जाएगा। बैठक में चंद्रकला वर्मा, बलदेव सिंह, बहादुर चौहान, बसंत सिंह, गुरुप्रेम सिंह, सुल्तान खान, रिछपाल राठौड़, ओमप्रकाश, जगदीश यादव, हरजी वर्मा, लाल सिंह, पप्पू सिंह, बूटासिंह, विनोद मावर, बग्गा सिंह प्रमोद साहनी, रघुवीर, राजकुमार, श्यामलाल, शिव कुमार, वली, शेराराम, रामचंद्र किराड़, बिंटू, राम सिंह, साहबराम, अमरजीत सिंह, लाभ सिंह, बबलू, बिल्लू और प्रहलाद मौजूद रहे।
