टिब्बी। कस्बे के डॉ. अंबेडकर भवन में शनिवार को डॉ. अंबेडकर नवयुवक संघ के तत्वावधान में समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 199वीं जयंती हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षाविद चानन सिंह सैनी उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता संघ अध्यक्ष एडवोकेट अमर सिंह बादड़ा ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में कॉलेज व्याख्याता अशोक कुमार सुथार और विजेंद्र कुमार छापोला ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा फुले के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि चानन सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा फुले ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के शोषित और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि फुले का मानना था कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जिसके जरिए समाज में व्याप्त असमानता को समाप्त किया जा सकता है। इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने वर्ष 1848 में पुणे में देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित कर नारी शिक्षा की नींव रखी। उन्होंने बताया कि कड़े सामाजिक विरोध के बावजूद फुले ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को शिक्षित कर देश की पहली महिला शिक्षिका बनाया और समाज सुधार के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने महात्मा फुले द्वारा स्थापित सत्यशोधक समाज की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके माध्यम से उन्होंने समाज को अंधविश्वास और मानसिक गुलामी से मुक्त होने का संदेश दिया। उनकी प्रसिद्ध कृतियां ‘गुलामगिरी’ और ‘किसान का कोड़ा’ आज भी समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही हैं। वक्ताओं ने यह भी कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी महात्मा फुले को अपना आदर्श और गुरु माना। वर्तमान समय में एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए उनके विचारों को आत्मसात करना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम का मंच संचालन भूपेंद्र कुमार सोलड़ा ने किया। इस दौरान संदीप घोड़ेला, कुलवंत सुथार, जगदीश कुमार, विनोद बीरट, सुरेंद्र स्वामी, दलिप बीरट, व्यापार मंडल अध्यक्ष विजय नोखवाल, ओमप्रकाश वर्मा, पूर्व पार्षद राम सिंह, शिव कुमार, चिंरजीवी लाल बौद्ध, शिवमंगल सिंह सुमन, अजय कुमार, मंजुल कुमार, दीपक कुमार, रणवीर सिंह, रमनदीप सहित अनेक गणमान्य नागरिक और ग्रामीण उपस्थित रहे।
संवाददाता- प्रभु राम
