जयपुर। प्रदेश की नई रिफाइनरी में लगी आग की घटना को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस घटना को सामान्य हादसा मानने से इनकार करते हुए इसके पीछे तोड़फोड़ या साजिश की आशंका जताई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग की है। गहलोत ने कहा कि किसी भी नई रिफाइनरी में इस प्रकार की आग लगना सामान्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने दावा किया कि तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार आमतौर पर 20-25 वर्ष पुरानी रिफाइनरियों में इस तरह की घटनाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन नई परियोजनाओं में इस तरह की चूक गंभीर सवाल खड़े करती है। पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने इस मामले में ऑस्ट्रेलिया के एक विशेषज्ञ से बातचीत की, जिन्होंने स्पष्ट किया कि नई रिफाइनरी में आग लगना असामान्य है। गहलोत के अनुसार इसके पीछे या तो तकनीकी चूक हो सकती है या फिर जल्दबाजी में काम पूरा करने का दबाव। उन्होंने यह भी कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि घटना के पीछे किसी प्रकार की साजिश या सबोटाज हो। गहलोत ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब देश का प्रधानमंत्री किसी क्षेत्र के दौरे पर होता है, तो सुरक्षा के मद्देनजर एसपीजी और अन्य एजेंसियां पहले से ही सक्रिय रहती हैं। ऐसे में इतनी बड़ी घटना का होना चिंताजनक है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद सरकार रक्षात्मक स्थिति में आ गई और तथ्यों के आधार पर स्पष्ट जवाब देने में असफल रही। गहलोत ने कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह जनता के सामने पारदर्शिता के साथ जवाब दे और बताए कि आखिर चूक कहां हुई। इस दौरान गहलोत ने किसानों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रदेश में किसानों की स्थिति को गंभीर बताते हुए सरकार से कर्ज माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है और सरकार को तत्काल राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। गहलोत ने कहा, “जिस तरह हमारी सरकार ने किसानों का कर्ज माफ किया था, उसी तर्ज पर वर्तमान सरकार को भी किसानों को राहत देनी चाहिए। किसान लंबे समय से कर्ज माफी का इंतजार कर रहे हैं।” उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। गहलोत ने कहा कि किसानों के काम को केवल 25-30 दिनों तक सीमित बताना उनकी मेहनत का अपमान है। उन्होंने कहा कि खेती एक निरंतर प्रक्रिया है जिसमें किसान सालभर मेहनत करता है। महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर भी गहलोत ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं हो रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक महिला आयोग की अध्यक्ष की नियुक्ति तक नहीं की गई है और शिक्षक भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का वादा भी अधूरा है। इसके अलावा गहलोत ने प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में हर स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त है और बिना पैसे के कोई काम नहीं हो रहा। उन्होंने दावा किया कि अब भ्रष्टाचार गांवों तक पहुंच चुका है, जिससे आम जनता परेशान है। रिफाइनरी आग की घटना और किसानों के मुद्दे को लेकर गहलोत के इन बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और जांच से क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।
