हनुमानगढ़। आगामी जनगणना में जातियों की सही, प्रमाणिक एवं वैज्ञानिक गणना सुनिश्चित करने की मांग को लेकर बुधवार को ओबीसी समाज के नागरिकों ने राष्ट्रपति के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से ओबीसी की स्पष्ट एवं अलग श्रेणी रखने, प्रत्येक जाति एवं समुदाय के लिए विशिष्ट वैज्ञानिक कोड निर्धारित करने तथा राज्यवार मानकीकृत जाति मास्टर लिस्ट तैयार करने की मांग की गई। पार्षद गुरदीप चहल ने कहा कि भारत में एक ही जाति अथवा समुदाय को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, पर्यायवाची नामों और अलग वर्तनी से जाना जाता है। यदि इन नामों को अलग-अलग दर्ज किया गया तो एक ही समुदाय की आबादी अलग-अलग आंकड़ों में बंट सकती है। इसलिए प्रमाणित पर्यायवाची, क्षेत्रीय नाम और वर्तनी के विभिन्न रूपों को एक ही मानक कोड से जोड़ने की वैज्ञानिक व्यवस्था की जाए। डिजिटल जनगणना में गणनाकर्ताओं के लिए सर्चेबल ड्रॉप-डाउन मेन्यू एवं असिस्टेड सिलेक्शन सिस्टम उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। इसमें प्रमाणित नामों को संबंधित जाति कोड से जोड़ा जाए तथा मास्टर लिस्ट में शामिल नहीं होने वाली वास्तविक जाति या समुदाय को अलग से दर्ज कर बाद में विशेषज्ञों से सत्यापित करने की व्यवस्था हो। ज्ञापन में जाति जनगणना की पद्धति तय करने से पहले समाजशास्त्रियों, सामाजिक मानवशास्त्रियों, जनसांख्यिकी विशेषज्ञों, सांख्यिकीविदों एवं सामाजिक न्याय विशेषज्ञों के साथ सामाजिक संगठनों और जाति-समुदाय प्रतिनिधियों से परामर्श करने की मांग की गई। साथ ही तेलंगाना के सोशियो-इकोनॉमिक, एजुकेशनल, एम्प्लॉयमेंट एंड पॉलिटिकल (एसईईईपी) कास्ट सर्वे के अनुभव एवं पद्धति का अध्ययन करने का आग्रह किया गया। रविन्द्र बेनीवाल ने कहा कि सही जातिगत आंकड़े शिक्षा, रोजगार, प्रतिनिधित्व, कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां बनाने में महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं। गलत आंकड़ों के आधार पर प्रभावी नीति नहीं बनाई जा सकती, इसलिए जनगणना शुरू होने से पहले ही जाति गणना की प्रक्रिया को वैज्ञानिक एवं त्रुटिरहित बनाना जरूरी है। ज्ञापन में कहा गया कि यह केवल ओबीसी समाज का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के विश्वसनीय आंकड़ों और वैज्ञानिक नीति-निर्माण से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है। इस मौके पर मनमोहन सोनी सहित ओबीसी समाज के कई नागरिक मौजूद थे।
