ऐलनाबाद। सी.आर.डी.ए.वी. गर्ल्स कॉलेज और सी.आर.डी.ए.वी. गर्ल्स कॉलेज ऑफ एजुकेशन, ऐलनाबाद के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार, 16 फरवरी को ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली और एनईपी 2020’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ देवी सरस्वती के समक्ष मुख्य अतिथि सी.डी.एल.यू. सिरसा के कुलगुरू प्रो. विजय कुमार द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. नरेन्दर सिंह परमार (उपनिदेशक, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, हरियाणा सरकार),प्रो. पंकज शर्मा(निदेशक, इमर्जिंग टेक्नोलॉजी सेंटर, सी.डी.एल.यू. सिरसा), प्रो. राजकुमार(निदेशक, आईक्यूएसी (IQAC), सी.डी.एल.यू. सिरसा)थे। इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और गौरवशाली इतिहास को आधुनिक शिक्षा नीति (NEP 2020) के साथ जोड़ना था। वक्ताओं ने बताया कि इसका लक्ष्य छात्राओं और शिक्षकों को भारतीय मूल्यों, आयुर्वेद, प्राचीन विज्ञान और गणित जैसे विषयों के महत्व को समझाना है, ताकि छात्र अपनी संस्कृति पर गर्व करते हुए वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना सकें। साथ ही, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और उसके फायदों पर भी विस्तार से चर्चा करना इसका लक्ष्य रहा।
कार्यक्रम के कॉलेज के चेयरमैन श्री ईश कुमार मेहता और शासी निकाय के अध्यक्ष जगदीश मेहता मुख्य संरक्षक रहे। सी.आर.डी.ए.वी. गर्ल्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. भूषण मोंगा, सी.आर.डी.ए.वी. गर्ल्स कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्राचार्य डॉ रणजीत सिंह संरक्षक रहे । इस अवसर पर महाविद्यालयक के कार्यकारी निदेशक डॉ. करुण मेहता , सीआरडीएवी स्कूल के प्राचार्य कमल मेहता व प्रबंधकीय सदस्य डोली मेहता उपस्थित रहे।

प्रो. विजय कुमार ने छात्राओं और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति का असली मकसद हमें अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि भारत का पुराना ज्ञान आज भी उतना ही जरूरी है जितना पहले था, और इसे आधुनिक पढ़ाई के साथ जोड़कर ही हम आगे बढ़ सकते हैं। संगोष्ठी के दौरान मुख्य वक्ता डॉ. नरेन्दर सिंह परमार ने भारतीय इतिहास और पुरातत्व के शैक्षणिक महत्व पर विचार रखे। प्रो. पंकज शर्मा और प्रो. राज कुमार ने तकनीकी सत्रों में ‘इमर्जिंग टेक्नोलॉजी’ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर व्याख्यान दिया। कॉलेज के चेयरमैन श्री ईश कुमार मेहता और प्रेसिडेंट श्री जगदीश चंद मेहता ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया और शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह के आयोजनों को भविष्य के लिए अनिवार्य बताया। दोपहर के तकनीकी सत्र में विभिन्न महाविद्यालयों से आए डेलीगेट्स और शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जिसमें शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर चर्चा की गई। कॉलेज के प्राचार्यों डॉ. भूषण मोंगा और डॉ. रणजीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति छात्राओं के भविष्य को संवारने में मील का पत्थर साबित होगी।डॉ. करुण मेहता और कमल मेहता ने बताया कि कैसे भारतीय पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर छात्र नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन सहायक प्राध्यापिका दीपशिखा द्वारा किया गया, कार्यक्रम को सफल बनाने में संयोजक सहायक प्राध्यापक अनंत कथूरिया और डॉ प्रभजोत कौर जबकि आयोजन सचिव सहायक प्राध्यापिका शालू बाला और सहायक प्राध्यापिका दीपशिखा और आयोजन समिति की सदस्य दीपिका मेहता, डॉ. सरला देवी, मोनिका कथूरिया , इंदु बाला कवलजीत कौर, दीपिका रानी व स्टाफ किरणदीप कौर, सिमरन कौर जैस्मिन कौर ,महक ,शैफी रितु, देवजोत, पूजा, गुरप्रीत कौर चारु,आराधना मेहता, अर्जुन सिंह, सोनाली कुसुम पूनम व अन्य स्टाफ सदस्य का विशेष सहयोग रहा।इसमें स्थानीय संस्थानों के अलावा अन्य महाविद्यालयों से आए प्राचार्य, सहायक प्राध्यापक और बड़ी संख्या में शोधार्थी व छात्र शामिल हुए।संगोष्ठी में कुल 150 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया और सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट बांटे गए और राष्ट्रगान के साथ सेमिनार का समापन हुआ।
